राज कॉमिक्स का “कोहराम” युग: जब हर पाठक को था अगले सेट का इंतज़ार। (The Era of Raj Comics’ “Kohram” : When Every Reader Waited For The Next Set)
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“कोहराम” सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं, राज कॉमिक्स के स्वर्णिम दौर की पहचान थी। (“Kohram” remains one of the biggest milestones in Raj Comics history.)
90 के दशक का समय भारतीय कॉमिक्स जगत के लिए किसी स्वर्णिम युग से कम नहीं था। उस दौर में जब नई कॉमिक्स का इंतज़ार बच्चों के लिए किसी त्योहार जैसा होता था, तब राज कॉमिक्स अपने हर नए सेट के साथ पाठकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा देती थी। कॉमिक्स के पिछले कवर पर छपा “राज कॉमिक्स पेश करते हैं” वाला पेज आज भी पुराने पाठकों के दिलों में खास जगह रखता है।

हाल ही में देवर्षि शर्मा, जो कि प्रसिद्ध देव काॅमिक्स स्टोर (Dev Comic Store) के संचालक हैं, उन्होंने अपने समूह में ऐसा ही एक दुर्लभ स्निपेट साझा किया जिसने पाठकों को सीधे उसी सुनहरे दौर में पहुँचा दिया।
यह स्निपेट सिर्फ कॉमिक्स की सूची नहीं है, बल्कि उस दौर की धड़कन है। बाईं ओर “इसी सेट के कॉमिक्स” और दाईं ओर “आगामी सेट के कॉमिक्स” की सूची दी गई है। उस समय पाठक अगले सेट की झलक देखकर ही रोमांचित हो जाते थे। लेकिन इस पूरे पेज की सबसे बड़ी खासियत है – “कोहराम” (Kohram)।
“कोहराम” क्यों था इतना खास?
राज कॉमिक्स के इतिहास में “कोहराम” को एक मील का पत्थर माना जाता है। यह सिर्फ एक सुपरहीरो कॉमिक्स नहीं थी, बल्कि राज कॉमिक्स यूनिवर्स के लगभग सभी बड़े नायकों का विशाल संग्राम था। उस समय 2 इन 1 कॉमिक्स का जबरदस्त क्रेज था और पाठकों को लंबी, भव्य और मल्टी-हीरो कहानियाँ बेहद पसंद आती थीं।

रचनाकार अनुपम सिन्हा जी और राज कॉमिक्स की कुशल टीम ने “कोहराम” के माध्यम से वह कर दिखाया जिसे उस दौर का भारतीय कॉमिक्स पाठक लंबे समय तक याद रखने वाला था। सुपर कमांडो ध्रुव, नागराज, डोगा और अन्य नायकों की मौजूदगी ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन जैसा बना दिया था।

दिल्ली कॉमिक कॉन में भी राज काॅमिक्स बाय संजय गुप्ता (Raj Comics By Sanjay Gupta) ने “कोहराम” को बड़े आकार (Big Size Format) में पुनः प्रकाशित किया था, जिसने पुराने पाठकों की यादों को फिर ताज़ा कर दिया। आप इसे देव काॅमिक स्टोर से मंगवा सकते है या अन्य प्लेटफार्मों से भी प्राप्त कर सकते हैं।
90s का वह इंतज़ार
आज डिजिटल दौर में नई रिलीज़ की जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती है, लेकिन 90s के पाठकों के लिए कॉमिक्स के पिछले पन्ने पर छपी आगामी सूची ही सबसे बड़ा टीज़र हुआ करती थी। बच्चे बार-बार उस पेज को पढ़ते थे, नामों से कहानियाँ कल्पना करते थे और अगली कॉमिक्स आने तक इंतज़ार करते रहते थे।

“कोहराम” जैसे नाम उस समय सिर्फ कॉमिक्स नहीं, बल्कि एक घटना बन जाते थे। यही कारण है कि आज भी जब ऐसे दुर्लभ पन्ने सामने आते हैं, तो पूरा कॉमिक्स समुदाय भावुक हो उठता है।
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राज कॉमिक्स का वह दौर सिर्फ कहानियों का नहीं, बल्कि कल्पनाओं, दोस्तियों और बचपन की यादों का दौर था और “कोहराम” उसकी सबसे गूंजती हुई आवाज़ों में से एक था। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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Raj Comics | Doga Origin Digest 2 | Graphic Novel




