नागराज का प्रथम उपन्यास: ओरिजिन सागा अब पेपरबैक रूप में – राज काॅमिक्स बाय मनोज गुप्ता। (Nagraj’s First Novel: The Origin Saga Now in Paperback – Raj Comics By Manoj Gupta)
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नागराज के आरंभिक सफर का अनसुना सच, अब एक उपन्यास में। (The Untold Beginning of India’s First Superhero, Now in a Novel Form)
आर्यावर्त के प्रथम सुपरहीरो नागराज को आज कौन नहीं जानता? 1986 से शुरू हुआ यह सफर अब 39 वर्ष पूरे कर चुका है। हर साल 5 अक्टूबर को देशभर के फैंस नागराज जन्मोत्सव मनाते हैं। यह वही दिन है जब 1986 में नागराज की पहली कॉमिक नागराज प्रकाशित हुई थी और 2008 से इस दिन को आधिकारिक रूप से “नागराज जन्म दिवस” के रूप में सेलिब्रेट किया जाने लगा।
लेकिन इस वर्ष का नागराज जन्मोत्सव एक विशेष उपहार लेकर आया।

मनोज गुप्ता द्वारा नागराज का पहला उपन्यास, अब पेपरबैक में।
राज कॉमिक्स बाय मनोज गुप्ता के निदेशक और नागराज के सहनिर्माता मनोज गुप्ता जी ने अपने आधिकारिक फेसबुक समूह में घोषणा की कि नागराज के पूरे सफर को जल्द ही एक उपन्यास श्रृंखला में प्रस्तुत किया जाएगा। इस श्रृंखला का पहला उपन्यास तैयार हो चुका है और प्री-ऑर्डर शुरू हैं।
यह उपन्यास नागराज की पहली तीन कॉमिक्स पर आधारित है। सबसे ख़ास बात इसमें उन कटे हुए प्रसंगों को भी जोड़ा गया है जो स्थानाभाव के कारण कॉमिक्स में शामिल नहीं हो सके थे। यानी पाठकों को मिलेगा नागराज के शुरुआती सफर का पूरा, विस्तृत और अनसुना रूप।
नागराज की कल्पना आतंकवाद के विष को हराने वाले जहरीले नायक के रूप में हुई थी। वर्ष 1984 में जब देश आतंकवाद से जूझ रहा था, तब राज कॉमिक्स के संस्थापक स्वर्गीय श्री राजकुमार गुप्ता ने एक ऐसे सुपरहीरो की कल्पना की जो स्वयं विषैला हो और अपने विष से आतंकवाद के विष को निष्क्रिय कर सके। एक ऐसा नायक जिसमें भारतीय पौराणिकता और आधुनिक कल्पना दोनों का अद्भुत संगम हो।
राजकुमार गुप्ता जी के मार्गदर्शन में राज काॅमिक्स ने नागराज की रचना पर दो साल तक शोध किया। अंततः अश्विन मास की द्वितीया को विक्रम संवत 2043 में नागराज की पहली कॉमिक तैयार हुई। यह कॉमिक आगे चलकर एक युग का आरंभ साबित हुई।

नागराज की सफलता के पीछे महान कलाकारों का योगदान
मनोज गुप्ता जी ने नागराज जन्मोत्सव के अवसर पर उन सभी रचनाकारों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने नागराज को आज जहाँ पहुँचाया है:
- श्री प्रताप मुलिक
- श्री परशुराम शर्मा
- श्री संजय अष्टपुत्रे
- श्री चंदू आर्टिस्ट
- श्री तरुण कुमार वाही
- श्री विनोद कुमार
- श्री ललित शर्मा
- श्री जगदीश कुमार
- श्री हेमंत कुमार
और सबसे महत्वपूर्ण नाम—
श्री अनुपम सिन्हा
जिन्होंने पिछले 35 वर्षों से नागराज रूपी शरीर में आत्मा का संचार किया।
खज़ाना, ड्रैकुला, त्रिफना जैसी उनकी शानदार श्रृंखलाओं ने नागराज को अमर प्रसिद्धि दिलाई।
उपन्यास में क्या मिलेगा?
- नागराज की शुरुआती तीन कॉमिक्स का विस्तृत रूप
- अनकही घटनाएं और हटाए गए प्रसंग
- नया संवाद, नए विस्तार और अधिक गहराई
- एक उपन्यास की तरह प्रवाहमान कहानी
- पेपरबैक फॉर्मेट में 200 पृष्ठ
यह न केवल पुरानी यादों को फिर से जीने जैसा है, बल्कि नए पाठकों के लिए नागराज के जन्म की पूरी कहानी जानने का सर्वोत्तम अवसर भी।
आज ही प्रीऑर्डर करें
उपन्यास का मूल्य ₹299 है और इसके ऑर्डर का डिस्पैच इसी सप्ताह शुरू हो रहा है। फैंस के लिए यह एक कलेक्टर एडिशन की तरह है, जिसे मिस नहीं किया जा सकता। आप इसे सभी पुस्तक विक्रेताओं एवं देव काॅमिक्स स्टोर से भी आर्डर कर सकते हैं।
मनोज गुप्ता जी के शब्दों में:
नागराज का यह सफर निरंतर जारी रहेगा। शीघ्र ही महानागायण श्रृंखला का अज्ञात पर्व आप तक पहुंचेगा।”
आभार – काॅमिक्स बाइट।।
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