फ्रेंडशिप डे स्पेशल: नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव – हिंदी कॉमिक्स की सबसे आइकॉनिक दोस्ती। (Friendship Day Special: Nagraj & Super Commando Dhruv – The Most Iconic Friendship in Indian Comics.)
![]()
दोस्ती… जो सिर्फ शब्द नहीं, एक वादा है! जब नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की आइकॉनिक जुगलबंदी ने हिंदी कॉमिक्स के इतिहास में रच दिया स्वर्णिम अध्याय। (Celebrating the legendary bond of Nagraj and Super Commando Dhruv on Friendship Day.)
हर साल फ्रेंडशिप डे हमें अपने उन दोस्तों की याद दिलाता है जो हर सुख-दुःख में हमारे साथ खड़े रहते हैं। लेकिन अगर हिंदी कॉमिक्स की दुनिया में सबसे बेहतरीन दोस्ती की बात की जाए, तो शायद ही कोई जोड़ी नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की बराबरी कर सके।

राज कॉमिक्स ने हमें अनेक महान सुपरहीरोज दिए, लेकिन जब भी नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव एक साथ आए, उन्होंने सिर्फ अपराधियों को ही नहीं हराया, बल्कि पाठकों के दिलों में भी अपनी एक अलग पहचान बना ली। यही कारण है कि तीन दशकों से भी अधिक समय बाद भी इनकी दोस्ती और इनकी टीम-अप कॉमिक्स उतनी ही लोकप्रिय हैं, जितनी अपने प्रकाशन के समय थीं।
जब पहली बार साथ आए दो महानायक
नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की पहली मुलाकात हुई राज कॉमिक्स की पहली विशेषांक “नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव” (डाइजेस्ट) में।

यह केवल एक नई कॉमिक नहीं थी, बल्कि राज कॉमिक्स के इतिहास का एक मील का पत्थर थी। इस कहानी में दोनों नायकों ने मिलकर दुष्ट मिस हिरोशिमा ए.के.ऐ मिस किलर के षड्यंत्र को नाकाम किया और अन्य सुपरहीरोज को उसके चंगुल से मुक्त कराया।
उस समय शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि यह जोड़ी आगे चलकर हिंदी कॉमिक्स की सबसे लोकप्रिय सुपरहीरो टीम बन जाएगी।
“नागराज और बुगाकू” – रोमांच का अगला अध्याय
पहली सफलता के बाद पाठकों को फिर से इन दोनों की जोड़ी देखने को मिली “नागराज और बुगाकू” में।

इस बार मुकाबला था मिसकिलर और अफ्रीका के निर्दयी अपराधी थोडांगा से, जिन्होंने ‘बुगाकू’ नाम के एक शक्तिशाली जापानी मार्शल आर्ट में निपुण योद्धा को तैयार किया था।
कहानी भारत से निकलकर अफ्रीका तक पहुँचती है और एक्शन, रोमांच तथा सस्पेंस से भरपूर यह विशेषांक आज भी क्लासिक मानी जाती है। उस दौर में इन डाइजेस्ट्स की लाखों प्रतियाँ बिकीं और पाठकों के बीच इनकी लोकप्रियता चरम पर पहुँच गई।
फिर आया एक लंबा इंतज़ार…
इन दोनों विशेषांकों की सफलता के बाद पाठकों की एक ही मांग थी की “नागराज और ध्रुव” को फिर साथ लाइए।
लेकिन समय के साथ दोनों सुपरहीरोज की अलग-अलग स्टोरीलाइन विकसित होने लगीं। अनुपम सिन्हा जी ने सुपर कमांडो ध्रुव की दुनिया को नई ऊँचाइयाँ दीं, जबकि नागराज भी लगातार नई चुनौतियों का सामना करता रहा।
हालाँकि पाठकों के दिलों में दोनों को फिर साथ देखने की इच्छा कभी खत्म नहीं हुई।
वर्ष 1996 – “राजनगर की तबाही” जिसने इतिहास रच दिया
फिर आया वह साल जिसने भारतीय कॉमिक्स जगत में हलचल मचा दी।
कॉमिक्स के पिछले पन्नों पर एक विज्ञापन दिखाई देने लगा:
बंधे हुए नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव…
बीच में टिक-टिक करता टाइम बम…
सामने स्क्रीन पर मुस्कुराता ग्रैंड मास्टर रोबो…
और नीचे कैप्शन लिखा था –
“राजनगर की तबाही”

बस यही एक चित्र हजारों पाठकों की कल्पनाओं को झकझोरने के लिए काफी था।
राजनगर, यानी सुपर कमांडो ध्रुव का शहर।
और दूसरी ओर था ग्रैंड मास्टर रोबो जो राज कॉमिक्स के सबसे बुद्धिमान, निर्दयी और खतरनाक सुपर विलेन्स में से एकमाना जाता है। वर्ष 1996 में जब यह विशेषांक प्रकाशित हुआ, तो उसने लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए।
₹25 की वह डाइजेस्ट… जिसे हर कोई पाना चाहता था

उस समय ₹25 का मूल्य भी कम नहीं मानी जाता था, लेकिन इसके बावजूद यह विशेषांक इतनी तेजी से बिका कि बाजार और लाइब्रेरी में इसका मिलना मुश्किल हो जाता था।
आज भी यह कॉमिक लगातार रीप्रिंट होती रहती है। हाल के वर्षों में ‘Raj Comics by Sanjay Gupta‘ ने इसका बड़े आकार का कलेक्टर एडिशन भी प्रकाशित किया, जिसे पाठकों ने भरपूर प्यार दिया।
यही किसी क्लासिक कॉमिक की सबसे बड़ी पहचान होती है, समय बदल जाता है, लेकिन उसकी लोकप्रियता नहीं।
दोस्ती… जो हर चुनौती में साथ रही
इसके बाद भी नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव कई यादगार कहानियों में साथ दिखाई दिए। प्रलय और विनाश जैसी अनेक कहानियों में दोनों ने मिलकर असंभव लगने वाली चुनौतियों का सामना किया।
इनकी दोस्ती केवल एक सुपरहीरो टीम-अप नहीं है।
यह विश्वास की कहानी है।
यह त्याग की कहानी है।
यह उस भरोसे की कहानी है कि जब पूरी दुनिया साथ छोड़ दे, तब भी आपका सच्चा दोस्त आपके साथ खड़ा रहेगा।

काॅमिक्स बाइट की कलम से
नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव ने हमें सिर्फ रोमांचक कहानियाँ नहीं दीं।
उन्होंने हमें सिखाया कि सच्ची दोस्ती शक्ति से नहीं, विश्वास से बनती है।
एक सच्चा दोस्त वही होता है—
- जो मुश्किल समय में सबसे पहले आपके साथ खड़ा हो।
- जो आपकी गलतियों पर आपको रोके।
- जो आपकी सफलता पर सबसे ज़्यादा खुश हो।
- और जो बिना किसी स्वार्थ के हमेशा आपका साथ निभाए।
शायद यही वजह है कि आज भी जब इन दोनों सुपरहीरोज का नाम साथ लिया जाता है, तो हर कॉमिक्स प्रेमी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
अगर आपके जीवन में भी कोई ऐसा दोस्त है जिसने हर मुश्किल में आपका साथ दिया है, तो आज उसे धन्यवाद कहना मत भूलिए।
और अगर वह कॉमिक्स पढ़ना पसंद करता है…
तो इस मित्रता दिवस पर उसे एक कॉमिक्स ज़रूर उपहार में दीजिए।
यकीन मानिए, यह सिर्फ एक किताब नहीं होगी, बल्कि आपकी दोस्ती की एक खूबसूरत याद बन जाएगी। आप सभी को फ्रैंडशिप डे की हार्दिक शुभकामनाएँ।
दोस्ती निभाइए… कॉमिक्स पढ़िए… और यादों को हमेशा ज़िंदा रखिए। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
Netra–Avadh: A Spellbinding Gurukul Fantasy from Pratilipi Comics & Westland




