स्ट्रीट फाइटर (2026) मूवी रिव्यू: स्ट्रीट फाइटर का महायुद्ध! बड़े पर्दे पर एक्शन का तूफान!
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अगर आपने कभी आर्केड या प्ले स्टेशन पर स्ट्रीट फाइटर खेला है, तो इस फिल्म को देखते हुए पुरानी यादें ताज़ा होना तय है। रियू, केन, चुन-ली और धलसिम जैसे किरदारों को बड़े पर्दे पर लड़ते हुए देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है। मैंने कल स्ट्रीट फाइटर (2026) देखी और मेरा अनुभव काफी शानदार रहा। फिल्म में जबरदस्त एक्शन है, खास लड़ाई वाले मूव्स हैं, गेम के जाने-पहचाने किरदार हैं और उनके पीछे चलने वाली कहानी भी है।

कुछ दर्शकों की शिकायत है कि फिल्म में कहानी नहीं है। लेकिन भाईसाब, एक सवाल तो बनता है क्या स्ट्रीट फाइटर देखने जाते समय हम किसी गंभीर और उलझी हुई कहानी की उम्मीद लेकर जाते हैं, या फिर उन किरदारों को बड़े पर्दे पर लड़ते हुए देखने के लिए, जिन्हें हमने सालों तक गेम में कंट्रोल किया है?

मेरे लिए इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यह गेम वाली दुनिया को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। और हां, हमारे अपने विद्युत जामवाल को धलसिम के रूप में देखना भारतीय दर्शकों के लिए एक खास आकर्षण है।
स्ट्रीट फाइटर (2026): फिल्म की जानकारी
- फिल्म का नाम: स्ट्रीट फाइटर
- निर्देशक: किताओ सकुराई
- शैली: एक्शन, रोमांच और मार्शल आर्ट्स
- आधार: कैपकॉम की लोकप्रिय स्ट्रीट फाइटर वीडियो गेम श्रृंखला
- प्रमुख कलाकार: एंड्रयू कोजी, नोआ सेंटीनियो, कैलीना लियांग, विद्युत जामवाल, जेसन मोमोआ, रोमन रेंस और 50 सेंट
- प्रदर्शन की तारीख: 16 अक्टूबर 2026

स्ट्रीट फाइटर की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी 1993 के दौर में स्थापित की गई है। इसके केंद्र में हैं रियू और केन मास्टर्स, जो कभी साथ प्रशिक्षण लिया करते थे। दोनों ने अपने गुरु गूकेन से मार्शल आर्ट्स की शिक्षा हासिल की थी। लेकिन गुरु की हत्या और अतीत से जुड़े घटनाक्रम उनके जीवन को अलग-अलग दिशाओं में ले जाते हैं।

कहानी में अकुमा का किरदार भी अहम है, जिसे डब्ल्यूडब्ल्यूई के सुपरस्टार रोमन रेंस ने निभाया है। इसके बाद चुना-ली की एंट्री होती है। कैलीना लियांग द्वारा निभाया गया यह किरदार अलग-अलग लड़ाकों को इकट्ठा करके उन्हें एक बड़े मुकाबले में शामिल करने की भूमिका निभाता है।
रियू और केन को भी इस प्रतियोगिता में वापस लाया जाता है। लेकिन यह कोई साधारण लड़ाई प्रतियोगिता नहीं है। इसके पीछे है शादालू का ताकतवर शासक एम. बाइसन, जिसे डेविड डैस्टमालचियन ने निभाया है।
एम. बाइसन की नजर रियू की असाधारण शक्ति पर है। वह अपनी ताकत और प्रभाव बढ़ाना चाहता है और इसके लिए कई चालें चलता है। इसी के साथ फिल्म में पुराने रिश्तों, गुरु की मौत, लड़ाकों के बीच प्रतिद्वंद्विता और पर्दे के पीछे चलने वाली साजिशों को जोड़ने की कोशिश की गई है।
यानी कहानी मौजूद है, लेकिन फिल्म का असली आकर्षण फिर भी इसके मुकाबले और किरदार हैं।
क्या फिल्म में सचमुच कहानी नहीं है?
यह सवाल थोड़ा दिलचस्प है। जो लोग फिल्म को सिर्फ एक सामान्य एक्शन फिल्म की तरह देखते हैं, उन्हें इसकी कहानी बिखरी हुई या कम प्रभावशाली लग सकती है। लेकिन अगर आप इसके स्रोत को समझते हैं, तो आपका नजरिया थोड़ा अलग हो सकता है।

स्ट्रीट फाइटर मूल रूप से एक लड़ाई वाला वीडियो गेम है। यहां रियू, केन, चुन-ली, धलसिम, गुइल और दूसरे किरदार अपनी अलग-अलग लड़ने की शैली, खास हमलों और व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाते हैं। गेम का रोमांच इस बात में है कि कौन किससे भिड़ेगा, किसका दांव भारी पड़ेगा और कौन अपना खास हमला करके मुकाबला पलट देगा।
यही वजह है कि इस फिल्म से किसी जटिल कहानी या बहुत गहरे किरदारों के विकास की उम्मीद रखना शायद सही तरीका नहीं है। हां, फिल्म में एक कहानी है, लेकिन वह इन मुकाबलों को जोड़ने और किरदारों को एक-दूसरे के सामने लाने का काम भी करती है।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि कहानी की आलोचना नहीं हो सकती। पटकथा, घटनाओं की गति और किरदारों को मिले समय पर सवाल उठाए जा सकते हैं। लेकिन केवल इसलिए फिल्म को खारिज कर देना कि इसमें कहानी से ज्यादा लड़ाई है, उसके गेमिंग वाले आधार को नजरअंदाज करना होगा।
आखिर टेक्केन, स्ट्रीट फाइटर और इनजस्टिस जैसे खेलों का मूल आकर्षण भी उनके अलग-अलग लड़ाके, उनकी क्षमताएं और उनके बीच होने वाले मुकाबले ही हैं।
विद्युत जामवाल बने धलसिम: भारतीय दर्शकों के लिए खास आकर्षण
इस फिल्म को लेकर भारतीय दर्शकों की उत्सुकता की एक बड़ी वजह विद्युत जामवाल हैं। वह धलसिम के किरदार में नजर आते हैं, जो स्ट्रीट फाइटर खेल श्रृंखला का एक जाना-पहचाना लड़ाका है।
विद्युत की मार्शल आर्ट्स में विशेषज्ञता और उनकी कलारीपयट्टू की ट्रेनिंग इस भूमिका को और दिलचस्प बनाती है। धलसिम जैसे किरदार के लिए शारीरिक नियंत्रण, फुर्ती और लड़ने की अलग शैली की जरूरत होती है। ऐसे में विद्युत को इस भूमिका में देखना एक अच्छा अनुभव है।

फिल्म में धलसिम की लड़ाइयां भी ध्यान खींचती हैं। खासकर बार में होने वाला मुकाबला और प्रतियोगिता के दौरान उसकी लड़ाई उन दृश्यों में शामिल हैं, जिनका गेम के प्रशंसक आनंद ले सकते हैं।
मुझे यह बात भी अच्छी लगी कि विद्युत की मौजूदगी सिर्फ भारतीय दर्शकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं रहती। वह उस दुनिया का हिस्सा हैं, जहां हर लड़ाके की अपनी पहचान और अपनी लड़ने की शैली है।
चुन-ली, रियू, केन और बाकी किरदार
फिल्म का एक बड़ा आकर्षण इसके जाने-पहचाने किरदार हैं।
चुन-ली (कैलीना लियांग): नीले कपड़ों में नजर आने वाली चुन-ली फिल्म में लड़ाकों को इकट्ठा करने और उन्हें प्रतियोगिता तक लाने में अहम भूमिका निभाती है। उसका अपना मिशन भी है और एम. बाइसन के साथ उसका टकराव कहानी को आगे बढ़ाता है।
रियू (एंड्रयू कोजी): रियू एक अनुशासित लड़ाका है, लेकिन उसका अतीत और उसके भीतर मौजूद खतरनाक शक्ति उसे लगातार चुनौती देती है।
केन मास्टर्स (नोआ सेंटीनियो): केन और रियू के बीच की दोस्ती, प्रतिद्वंद्विता और पुरानी नाराजगी कहानी का भावनात्मक हिस्सा है। दोनों के बीच का टकराव फिल्म को सिर्फ लड़ाइयों की श्रृंखला बने रहने से थोड़ा आगे ले जाता है।

अकुमा (रोमन रेंस): रोमन रेंस का यह किरदार फिल्म के सबसे अहम खतरों में से एक है। अकुमा की ताकत और रियू से उसका संबंध कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एम. बाइसन (डेविड डैस्टमालचियन): शादालू का यह तानाशाह अपनी ताकत और प्रभाव बढ़ाना चाहता है। उसकी साजिशें फिल्म के संघर्ष का बड़ा हिस्सा हैं। उसका पहनावा और व्यक्तित्व भी एक खलनायक वाली छवि पेश करता है।
ब्लांका (जेसन मोमोआ): जेसन मोमोआ को ब्लांका के रूप में देखना भी दिलचस्प है। उनका किरदार फिल्म की रंगीन और असाधारण दुनिया का एक अहम हिस्सा है।

बालरॉग (50 सेंट): रैपर और अभिनेता 50 सेंट ने मुक्केबाज बालरॉग की भूमिका निभाई है। गेम में इस किरदार को जानने वाले दर्शकों के लिए उसकी मौजूदगी एक और पहचानने लायक पल है।
इनके अलावा गुइल, वेगा, ज़ैंगिफ, ई. होंडा, कैमी और डैन हिबिकी जैसे किरदार भी स्ट्रीट फाइटर की दुनिया को विस्तार देते हैं। इतने सारे किरदारों को एक ही फिल्म में देखना अपने आप में प्रशंसकों के लिए आकर्षण है।
स्ट्रीट फाइटर की लड़ाइयां कैसी हैं?
फिल्म का सबसे मजेदार हिस्सा इसकी लड़ाइयां हैं। मुकाबलों में गेम वाली ऊर्जा लाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग किरदारों की लड़ने की शैलियां और उनकी विशेष क्षमताएं फिल्म को एक सामान्य मार्शल आर्ट्स फिल्म से अलग पहचान देती हैं।
यहां सिर्फ मुक्के और किक नहीं हैं। स्पेशल मूव्स, शक्तिशाली वार और गेम से जुड़े अंदाज को भी बड़े पर्दे पर उतारा गया है। जिन लोगों ने स्ट्रीट फाइटर खेला है, उनके लिए इन चीजों को पहचानना और भी मजेदार हो सकता है। फिल्म के बीच में एनीमेशन अपनी अलग छाप छोड़ जाता है।

धलसिम की लड़ाइयां, बालरॉग का मुक्केबाजी वाला अंदाज और रियू-केन के बीच का टकराव एक्शन के अलग-अलग रंग सामने लाते हैं। फिल्म में कुछ छोटे-छोटे कैमियो और सरप्राइज भी हैं, जो मनोरंजन बढ़ाते हैं।
अगर आप एकदम वास्तविक मार्शल आर्ट्स फिल्म देखने की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो इसका रंगीन और अतिरंजित अंदाज आपको थोड़ा अजीब लग सकता है। लेकिन यह स्ट्रीट फाइटर है और इसकी पहचान ही इसके असाधारण लड़ाके और उनके शानदार मूव्स हैं।
क्या 1994 की स्ट्रीट फाइटर फिल्म से तुलना करनी चाहिए?
पुरानी स्ट्रीट फाइटर फिल्म का जिक्र आना स्वाभाविक है। 1994 में भी इस लोकप्रिय खेल को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई थी। इसलिए पुराने प्रशंसकों के लिए तुलना का एक संदर्भ जरूर मौजूद है।
लेकिन 2026 की फिल्म को सिर्फ उसी पैमाने पर आंकना ठीक नहीं होगा। गेमिंग श्रृंखला का अपना इतिहास है और हर नई फिल्म का अपना दृष्टिकोण होता है।

अगर आप पुराने गेम और उनके किरदारों से परिचित हैं, तो नई फिल्म में कई ऐसी चीजें मिलेंगी जो आपको पसंद आ सकती हैं। वहीं, अगर आपने कभी स्ट्रीट फाइटर खेला ही नहीं है और आप एक मजबूत कहानी वाली एक्शन फिल्म देखने जा रहे हैं, तो शायद आपका अनुभव अलग हो।
यह फिल्म उन दर्शकों के लिए ज्यादा काम करती है, जिन्हें पहले से मालूम है कि रियू कौन है, केन का महत्व क्या है और धलसिम जैसे किरदार इस श्रृंखला में क्यों खास हैं।
स्ट्रीट फाइटर (2026) की कमजोरियां
एक अच्छी समीक्षा में सिर्फ तारीफ करना काफी नहीं है। इस फिल्म की कुछ सीमाएं भी हैं।
सबसे पहली बात, इतने सारे किरदारों को जगह देने के कारण कहानी कई दिशाओं में जाती हुई महसूस हो सकती है। कुछ दर्शकों को हर किरदार के लिए पर्याप्त समय न मिलने की शिकायत हो सकती है।
दूसरी बात, अगर आप गेम की दुनिया से परिचित नहीं हैं, तो कुछ किरदारों की मौजूदगी, उनकी क्षमताओं और उनके आपसी रिश्तों को समझने में समय लग सकता है।

तीसरी बात, फिल्म का अंदाज काफी हद तक गेम की दुनिया जैसा है। इसमें वास्तविकता से ज्यादा शैली, रंगीन किरदारों और शानदार मुकाबलों को प्राथमिकता दी गई है। यह कुछ दर्शकों को पसंद आएगा, जबकि कुछ इसे जरूरत से ज्यादा बनावटी मान सकते हैं।
इसके बावजूद, ये कमियां फिल्म के मनोरंजन वाले पक्ष को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं।
स्ट्रीट फाइटर (2026): निष्कर्ष
मेरे लिए स्ट्रीट फाइटर (2026) एक शानदार गेम पर आधारित एक्शन फिल्म है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके किरदार, लड़ाइयां, खास मूव्स और गेम की दुनिया को बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव है।
मैंने खुद स्ट्रीट फाइटर खेला है, इसलिए इस फिल्म को देखते समय मेरे लिए सिर्फ कहानी मायने नहीं रखती। मेरे लिए यह भी मायने रखता है कि रियू, केन, चुन-ली और धलसिम जैसे किरदार पर्दे पर कैसे नजर आते हैं, उनके मुकाबले कैसे दिखाए गए हैं और फिल्म उस गेमिंग दुनिया की भावना को कितना पकड़ पाती है।

विद्युत जामवाल का धलसिम के रूप में नजर आना भारतीय दर्शकों के लिए अतिरिक्त खुशी की बात है। जेसन मोमोआ, रोमन रेंस और 50 सेंट जैसे नाम भी इस फिल्म के कलाकारों को अलग पहचान देते हैं।
क्या यह हर दर्शक को पसंद आएगी? शायद नहीं। अगर आप एक गहरी कहानी, बहुत गंभीर माहौल और पूरी तरह वास्तविक लड़ाई की उम्मीद रखते हैं, तो हो सकता है यह फिल्म आपके लिए न हो। लेकिन अगर आपने गेम खेला है, इसके किरदारों को जानते हैं और उन्हें बड़े पर्दे पर भिड़ते हुए देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक मजेदार अनुभव बन सकती है।
और भाईसाब, हर फिल्म से एक जैसी कहानी की उम्मीद भी क्यों करनी? कभी-कभी दो लड़ाकों को आमने-सामने खड़ा करके उनका शानदार मुकाबला देखना भी अपने आप में पूरा मनोरंजन होता है!
स्ट्रीट फाइटर (2026) गेम के प्रशंसकों के लिए जरूर देखने लायक फिल्म है।
अब आपकी बारी! आपने स्ट्रीट फाइटर देखी है? आपको विद्युत जामवाल का धलसिम कैसा लगा? क्या फिल्म में सचमुच कहानी की कमी है या फिर गेम के प्रशंसकों के लिए इसका एक्शन ही काफी है? अपनी राय कॉमिक्स बाइट के कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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