एवीजीसी सेक्टर और भारतीय कॉमिक्स का नया उदय। (AVGC Sector and the Revival of Indian Comics)
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भारत का AVGC सेक्टर (Animation, VFX, Gaming & Comics) आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ रचनात्मकता सिर्फ कला नहीं, बल्कि एक सशक्त करियर विकल्प के रूप में उभर रही है। हालिया केंद्रीय बजट में भले ही इस सेक्टर का ज़िक्र संक्षेप में हुआ हो, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं खासतौर पर भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री के लिए।
भारत में कॉमिक्स कभी सिर्फ एक माध्यम नहीं थी वह पीढ़ियों की स्मृति, कल्पना और संस्कृति का हिस्सा थी। फिर समय बदला, माध्यम बदले, और कॉमिक्स धीरे-धीरे मुख्यधारा से बाहर होती चली गई। लेकिन आज, AVGC सेक्टर को लेकर सरकार की नई सोच यह संकेत दे रही है कि भारत एक बार फिर अपनी विज़ुअल स्टोरीटेलिंग की ताकत को पहचानने लगा है।
AVGC: अब सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, एक इंडस्ट्री
सरकार द्वारा AVGC सेक्टर को “Orange Economy” के रूप में देखना यह संकेत देता है कि अब रचनात्मक क्षेत्रों को भी आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन का मजबूत स्तंभ माना जा रहा है। एनिमेशन, वीएफएक्स और गेमिंग के साथ-साथ कॉमिक्स को भी इस फ्रेमवर्क में शामिल करना, अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है।
कॉमिक्स, जिन्हें लंबे समय तक केवल बच्चों की पढ़ाई या शौक समझा गया, अब स्टोरीटेलिंग, IP क्रिएशन और डिजिटल कंटेंट का अहम माध्यम बनते जा रहे हैं। इसका राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व गहरा है। यह पहली बार है जब कॉमिक्स को भी नीति स्तर पर उसी पंक्ति में खड़ा किया गया, जहाँ एनिमेशन और गेमिंग जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर हैं। यह स्वीकारोक्ति इस बात की है कि:
कहानियाँ भी अर्थव्यवस्था बनाती हैं।”
ICA / IICT के गठन से आई नई गति
इंडियन काॅमिक्स एसोसिएशन (ICA) के उपक्रम एवं Indian Institute of Creative Technologies (IICT) और इससे जुड़े कंटेंट क्रिएटर लैब्स के गठन के बाद AVGC सेक्टर को एक ठोस ढांचा मिला है। यही वह बिंदु है जहाँ से कॉमिक्स को भी नई रफ्तार मिली है।
इन पहलों के ज़रिये:
- कॉमिक बुक आर्ट, स्क्रिप्ट राइटिंग और विज़ुअल नैरेटिव को औपचारिक प्रशिक्षण मिलेगा
- युवा कलाकार सिर्फ पाठक नहीं, बल्कि प्रोफेशनल क्रिएटर बनेंगे
- भारतीय कहानियाँ वैश्विक मंच पर बेहतर तरीके से प्रस्तुत हो सकेंगी
यह कहना गलत नहीं होगा कि ICA/IICT के बाद कॉमिक्स को संस्थागत मान्यता मिलनी शुरू हो गई है और इस सेक्टर में जो गति आई है, उसने कॉमिक्स को भी उसी धारा में बहने का मौका दिया है।
कॉमिक्स की वापसी: एक बार फिर प्रचलित माध्यम
आज कॉमिक्स सिर्फ अतीत की याद नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का माध्यम बन रही है। देशभर में हो रहे Comic Con, Book Fair और Pop Culture Events इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं जहाँ लाखों की संख्या में उमड़ती भीड़, खासतौर पर Gen Z, कॉमिक्स की ओर खिंची चली आ रही है।
Gen Z के लिए:
- कॉमिक्स तेज़, विज़ुअल और रिलेटेबल हैं
- डिजिटल कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवेल उनकी भाषा बोलते हैं
- देसी सुपरहीरोज़ और लोककथाएँ उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं
यह साफ संकेत है कि कॉमिक्स धीरे-धीरे Gen Z की पसंद बन रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और इंडी पब्लिशिंग ने कॉमिक्स को नया जीवन दिया और अब सरकार की पहल उसे स्थायित्व दे सकती है।
काॅमिक्स बाइट का नजरिया: देर से आया, लेकिन दुरुस्त आया
यह सच है कि Government of India की यह पहल थोड़ी देर से आई, लेकिन जब आई तो बिल्कुल सही वक्त पर आई।
आज जब भारतीय कॉमिक्स:
- दोबारा लोकप्रिय हो रही है
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विस्तार पा रही है
- एनिमेशन और गेमिंग से जुड़कर नए रूप ले रही है
ऐसे समय में AVGC को मिला सरकारी समर्थन लंबे समय तक असर डालने वाला कदम साबित हो सकता है। हमारा मानना है कि यह सिर्फ एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि भारतीय कॉमिक्स के पुनर्जागरण की शुरुआत है।
अगर सही तरीके से:
- टैलेंट को गाइड किया गया जाए
- कॉमिक्स को सिर्फ सपोर्टिंग सेक्टर नहीं, कोर क्रिएटिव फॉर्म माना जाए
- ओरिजिनल इंडियन IP को बढ़ावा दिया गया
- कॉमिक्स को शिक्षा और इंडस्ट्री से जोड़ा जाए
- प्रशिक्षण के साथ-साथ पब्लिशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पर भी ध्यान दिया जाए
तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय कॉमिक्स फिर से जन-जन का माध्यम बन जाएगी ठीक वैसे ही, जैसे कभी हुआ करती थी, आज से लगभग ढाई दशक पहले। आपका इस बजट और AVGC सेक्टर में हो रहे इन बदलावों पर क्या सोचना है? आपनी राय से हमें अवगत अवश्य करवाएं। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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