राजन इकबाल: हॉन्टेड होटल – क्लासिक जासूसी जोड़ी की वापसी। (Rajan Iqbal: Haunted Hotel – The Return of a Legendary Detective Duo in a Horror Thriller)
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राजन इकबाल: हॉन्टेड होटल जब – डर, रहस्य और साजिश एक ही कमरे में कैद हो जाए!
हिंदी जासूसी और थ्रिलर साहित्य में अगर किसी नाम ने पीढ़ियों तक पाठकों को बांधे रखा है, तो वह है “राजन–इकबाल”। एक ऐसी जासूसी जोड़ी, जिन्हें कभी बाल सीक्रेट एजेंट कहा जाता था। तेज़ दिमाग, गहरी सूझ-बूझ और हर मुश्किल को तर्क की कसौटी पर परखने की आदत। इन कालजयी पात्रों की रचना स्वर्गीय श्री एस.सी. बेदी जी ने की थी, जिन पर उन्होंने सैकड़ों बाल पॉकेट बुक्स और उपन्यास प्रकाशित किए। डायमंड कॉमिक्स ने भी इन्हीं पात्रों पर आधारित कई यादगार कॉमिक्स पाठकों को दीं।

अब वही किरदार एक नए दौर में, नए रंग और नए तेवर के साथ लौटे हैं, “राजन इकबाल रिबोर्न” श्रृंखला में, जिसे फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स नियमित रूप से प्रकाशित कर रहा है। और इसी शृंखला की एक दमदार कड़ी है
“राजन इकबाल: हॉन्टेड होटल” (Rajan Iqbal: Haunted Hotel)
कहानी की शुरुआत होती है शहर के एक नामी होटल से, जहाँ कमरा नंबर 108 पिछले बीस वर्षों से बदनाम है। इस कमरे में यह चौथी मौत थी और हैरानी की बात यह कि पिछली तीनों मौतें खुदकुशी बताई गई थीं। इस बार शिकार बना युवा बिजनेसमैन यश मेहता, जिसकी लाश चेहरे पर अजीब सी मुस्कान के साथ मिलती है। यही मुस्कान पूरे केस को और भी डरावना बना देती है।
- क्या यह किसी आत्मा का प्रकोप है?
- क्या होटल वाकई हॉन्टेड है?
- या फिर यह सब किसी बेहद शातिर दिमाग की रची गई साजिश है?
यहीं से एंट्री होती है राजन और इकबाल की। जैसे-जैसे वे जांच में आगे बढ़ते हैं, होटल की दीवारों के पीछे छिपे झूठ, फरेब और रिश्तों के काले सच सामने आने लगते हैं। हर सुराग एक नई दिशा दिखाता है, लेकिन हर जवाब के साथ सवाल और गहरे होते चले जाते हैं। कहानी डराती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है क्योंकि हर बार ऐसा लगता है कि सच्चाई बस सामने है, लेकिन फिर कोई नया मोड़ सब कुछ बदल देता है।
“हॉन्टेड होटल” सिर्फ एक हॉरर कहानी नहीं है। यह एक ऐसा हॉरर-थ्रिलर है जहाँ परालौकिक डर और इंसानी लालच आमने-सामने टकराते हैं। लेखक बड़े सधे हुए तरीके से पाठक को यह तय करने नहीं देता कि डर भूतों से ज्यादा है या इंसानों से।
इस कहानी को और खास बनाती है लेखक शुभानंद की लेखनी। लखनऊ से आने वाले शुभानंद जी की पहचान उनकी तेज़, ग्रिपिंग और बिना भटकाव वाली कहानी कहने की शैली है। रहस्य, सस्पेंस, हॉरर और थ्रिलर, हर शैली में उनकी पकड़ साफ़ झलकती है। जावेद अमर जाॅन सीरीज़ से लेकर मास्टरमाइंड , अंतर्द्वंद्व – द इटरनल वाॅर, जिस्म बदलने वाले और ड्राॅप डेड जैसे उपन्यासों तक, उन्होंने हिंदी पाठकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
136 पृष्ठों की यह किताब कहीं भी अनावश्यक लंबी नहीं लगती। ₹199 मूल्य की, पर यह एक ऐसा अनुभव देती है जो आखिरी पन्ने तक पाठकों को बांधे रखती है। खास बात यह है कि पुराने राजन-इकबाल के प्रशंसकों के साथ-साथ नए पाठकों के लिए भी यह किताब पूरी तरह सुलभ और रोचक है।
पुस्तक विवरण (Book Details)
पुस्तक का नाम: राजन इकबाल: हॉन्टेड होटल (Rajan Iqbal: Haunted Hotel)
श्रृंखला: राजन इकबाल रिबोर्न (Horror Thriller Series)
लेखक: शुभानंद
प्रकाशक: फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स
संस्करण: पहला
भाषा: हिंदी
कुल पृष्ठ: 136
शैली (Genre): हॉरर, सस्पेंस, मिस्ट्री, जासूसी थ्रिलर
फॉर्मेट: पेपरबैक
मूल्य: ₹199/-
उपलब्धता: अमेजन, फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स और चुनिंदा बुक स्टोर्स
आज जब पाठक बार-बार यह मांग कर रहे हैं कि क्लासिक भारतीय जासूसी किरदारों को नए दौर में वापस लाया जाए, राजन इकबाल: हॉन्टेड होटल उस उम्मीद को मजबूती से पूरा करता है।
क्या आपने कभी राजन-इकबाल की कहानियाँ पढ़ी हैं?
और अगर नहीं, तो क्या हॉन्टेड होटल आपकी पहली एंट्री बनने वाली है इस रहस्यमयी दुनिया में? आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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