डॉक्टर वायरस – सुपर कमांडो ध्रुव: 90 के दशक की सुपरहिट राज काॅमिक्स। (Doctor Virus: The 90s Super Commando Dhruv Classic That Still Feels Ahead of Its Time)
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सुपर कमांडो ध्रुव बनाम डॉक्टर वायरस – एक साइंस-फिक्शन थ्रिलर। (Super Commando Dhruv vs Doctor Virus – A gripping sci-fi showdown.)

Artwork & Story By Anupam Sinha
Cover Art By Pratap Mullick
काफी लंबे समय बाद आज फिर से कॉमिक्स पढ़ने की इच्छा जागी। आजकल भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पढ़ने का समय मिलना मुश्किल हो जाता है, लेकिन जैसे ही मौका मिलता है, मन अनायास ही 90 के दशक की पुरानी कॉमिक्स की तरफ खिंच जाता है। खास तौर पर ‘राज काॅमिक्स’ के 1988 से लेकर शुरुआती 2000 तक का दौर भारतीय कॉमिक्स प्रेमियों के लिए स्वर्ण युग जैसा था। उस समय प्रकाशित कॉमिक्स में जो कहानी, आर्टवर्क और रोमांच था, वह आज भी उतना ही ताज़ा और प्रभावशाली लगता है।
इसी सुनहरे दौर की एक शानदार पेशकश है डॉक्टर वायरस, जो सुपर कमांडो ध्रुव की विशेषांक श्रृंखला की एक यादगार कॉमिक है, जिसे प्रकाशित किया था राज कॉमिक्स ने। इस कॉमिक के रचयिता अनुपम सिन्हा हैं, जिनकी कल्पनाशीलता और कहानी कहने की कला इस कॉमिक को एक अलग ही स्तर पर ले जाती है।
ध्रुव बनाम एक अनोखा खलनायक
इस कहानी में ध्रुव का सामना होता है एक बेहद खतरनाक और रहस्यमयी विलेन ‘डॉक्टर वायरस’ से। ‘वायरस’ यह नाम भले आज के समय में अलग अर्थ रखता हो, लेकिन इस कॉमिक में डॉक्टर वायरस एक ऐसा वैज्ञानिक है जो लोगों पर प्रयोग करता है। वह उन्हें मारता नहीं, बल्कि अपने एक्सपेरिमेंट्स के जरिए उन्हें विचित्र और खतरनाक शक्तियां देता है, और फिर उन्हीं शक्तियों का इस्तेमाल अपने आपराधिक साम्राज्य को बढ़ाने के लिए करता है।
उसकी राह में सबसे बड़ी बाधा है सिर्फ एक नाम — सुपर कमांडो ध्रुव।
अनोखे किरदारों की भरमार
कॉमिक्स की सबसे बड़ी खासियत इसके अनोखे पात्र हैं। पहली बार पाठकों को बर्फ मानव जैसे किरदार देखने को मिलते हैं, वहीं वनपुत्र की वापसी होती है, जो पेड़-पौधों को नियंत्रित कर उनसे बात कर सकता है। इसके अलावा वृक्षपशु और वृक्षमानव जैसे प्रयोगों से जन्मे अजीबोगरीब जीव जो चित्रकथा को और भी रोचक बनाते हैं।

हर पन्ने पर एक्शन, सस्पेंस और रोमांच इस तरह परोसा गया है कि 60 पन्नों की यह कॉमिक्स किसी सिनेमाई अनुभव से कम नहीं लगती। ध्रुव की रणनीति, उसकी फुर्ती और बुद्धिमत्ता कहानी को लगातार गति देती है। नए-नए पात्र पाठकों की उत्सुकता जगा कर रखते हैं।
90 के दशक का सुनहरा दौर
उस दौर में नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, परमाणु और भेड़िया जैसे नायकों की कॉमिक्स लगातार आ रही थीं और सुपरहिट हो रही थीं। लाइब्रेरी में इन कॉमिक्स के लिए होड़ मची रहती थी। हर नई रिलीज़ एक उत्सव की तरह होती थी।
डॉक्टर वायरस उसी दौर की एक मिसाल है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है। आज हम जिन साइंस-फिक्शन फिल्मों और सीरीज़ को देखकर रोमांचित होते हैं, वैसी कल्पनाएं उस समय भारतीय कॉमिक्स में देखने को मिल जाती थीं।
यादें जो कभी पुरानी नहीं होतीं
इस कॉमिक्स जुड़ी मेरी अपनी भी एक खास याद है। जब पहली बार इसे हाथ में लिया था, तो वह अनुभव बिल्कुल अलग था जैसे एक नई दुनिया के दरवाज़े खुल गए हों। उसके बाद न जाने कितनी बार इसे पढ़ चुका हूं, लेकिन हर बार वही ताज़गी और उत्साह महसूस होता है। आज फिर से इसे पढ़ते हुए वही पुराना जादू लौट आया।
अगर कभी आपको कुछ अच्छा पढ़ने का मन हो और समझ न आए कि क्या पढ़ें, तो 1988 से 2000 के बीच प्रकाशित कोई भी पुरानी राज कॉमिक्स विशेषांक उठाइए। यकीन मानिए, आप बोर नहीं होंगे। इन्हें पढ़ने का आनंद ही अलग है। खुद पढ़िए और दूसरों को भी गिफ्ट कीजिए। यह सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं, बल्कि यादों और रोमांच से भरा एक अनुभव है। जल्द ही इसका विस्तृत रिव्यू भी साझा करूंगा, लेकिन आज के लिए इतना कहना काफी है कि “यह कॉमिक्स आज भी उतनी ही शानदार है जितनी अपने समय में थी।” आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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