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धुरंधर रिव्यू: भारत के गुमनाम जासूसों को सलाम करती एक दमदार फिल्म (Dhurandhar Review: A Gritty Tribute to India’s Unsung Spies)

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भारतीय सिनेमा की सबसे डार्क और रियलिस्टिक स्पाई थ्रिलर “धुरंधर”। (“Dhurandhar”, the darkest and most realistic spy thriller of Indian cinema.)

वैसे तो कॉमिक्स बाइट पर हम अक्सर उन फिल्मों की चर्चा करते हैं जिनका सीधा या अप्रत्यक्ष रिश्ता कॉमिक्स, ग्राफिक नॉवेल और पल्प फिक्शन से जुड़ा होता है। पर धुरंधर की बात कुछ और है और यह भी उन्हीं चुनिंदा फिल्मों में से है जिनकी बात अगर इस प्लेटफार्म में ना हुई तो फिर इसका औचित्य ही क्या बना। भले ही इस फिल्म पर पहले ही कई रिव्यूज आ चुके हों, लेकिन कुछ ऐसे पहलू हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, खासकर तब, जब जासूसी की यह दुनिया खुद कॉमिक्स और साहित्य में बेहद लोकप्रिय रही है।

Dhurandhar Movie Review
Dhurandhar Movie Review

अगर हम साहित्य और कॉमिक्स की बात करें, तो जेम्स बॉन्ड से बड़ा स्पाई किरदार शायद ही किसी और का हो। भारत में भी आर्थर काॅनन डायल जी के किरदार शर्लक होम्स जैसे पात्रों ने अनुवादित रूप में इन्हें देसी पहचान दी है। राज कॉमिक्स में तिरंगा और मनोज काॅमिक्स की जासूसी जोड़ी राम-रहीम से शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा, बाल पाॅकेट बुक्स वाले राजन-इकबाल का भी अपना एक दौर था। बाॅलीवुड ने एक था टाइगर, बेबी, फैंटम, एजेंट विनोद और स्पाई ट्रिलॉजी (यश राज की पठान, वाॅर) जैसी फिल्मों में स्पाई एंगल जरूर दिखाया, लेकिन धुरंधर पहली बार उस रॉ और उसके अंधेरे जासूसी संसार को सामने लाती है, जहां देश के लिए काम करने वाले लोग गुमनामी में जीते हैं और अक्सर गुमनामी में ही मर जाते हैं। यह वास्तविकता और रियल हीरोज पर आधारित है जो वाकई में सुपरहीरो वाला जिगरा रखते हैं।

🎭 कहानी: पहचान मिटाकर लड़ी जाने वाली जंग

फिल्म की कहानी केंद्रित है हमज़ा अली मज़ारी उर्फ जसकीरत सिंह रंगी (रणवीर सिंह) पर। एक ऐसा भारतीय नागरिक, जो डेथ-रो कैदी होते हुए भी भारतीय खुफिया तंत्र द्वारा एक बेहद खतरनाक अंडरकवर मिशन के लिए चुना जाता है। उसकी पहचान, अतीत और भविष्य – तीनों को मिटाकर उसे पाकिस्तान के कराची शहर में उतारा जाता है, जहाँ अपराध, आतंक और राजनीति एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं।

Ranveer Singh as 'Hamza' in Dhurandhar
Ranveer Singh as ‘Hamza’ in Dhurandhar

मिशन का लक्ष्य है रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) जो बलोच गैंग का सरगना है, जिसकी पकड़ कराची के कुख्यात ल्यारी इलाके से लेकर सीमा पार तक फैली हुई है।

🧠 खुफिया तंत्र और पावर स्ट्रक्चर

भारतीय पक्ष से इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभालते हैं अजय सान्याल (आर. माधवन) इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर, जिनका किरदार स्पष्ट रूप से भारत के रियल-लाइफ रणनीतिकारों (जो अजित डोवाल जी के रंग-रूप में ढले लगते है) से प्रेरित लगता है।

R Madhvan as 'Ajay Sanyal' in Dhurandhar
R Madhvan as ‘Ajay Sanyal’ in Dhurandhar

उनका कैरेक्टर सिर्फ आदेश देने वाला अफसर नहीं, बल्कि एक शतरंज के खिलाड़ी की तरह हर मोहरे को सोच-समझकर चलने वाला दिमाग है। दूसरी ओर, पाकिस्तान में शक्ति का संतुलन संभालते हैं मेजर इक़बाल (अर्जुन रामपाल), एक हाई-रैंकिंग आई.एस.आई अधिकारी, जो रहमान डकैत जैसे तत्वों को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करता है। अर्जुन रामपाल का यह किरदार ग्रे शेड्स से भरा हुआ है, बर्बर और ना ही भरोसेमंद।

🚨 लॉ एनफोर्समेंट और सियासत का गठजोड़

कराची के लायरी इलाके में कानून का चेहरा हैं एस.पी. चौधरी असलम (संजय दत्त) जो सिंध पुलिस की लायरी टास्क फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी है। उनका किरदार बताता है कि कैसे सिस्टम के भीतर रहते हुए भी कुछ लोग हालात के हाथों मजबूर हो जाते हैं।

सियासी ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं जमील जमाली (राकेश बेदी) जो एक प्रभावशाली नेता है और जिसकी बेटी यालिना जमाली (सारा अर्जुन) कहानी में एक मानवीय और भावनात्मक एंगल जोड़ती है। यालिना और हमज़ा का रिश्ता फिल्म को थोड़ी राहत देता है, लेकिन यह रिश्ता भी शक और खतरे की छाया से बाहर नहीं निकल पाता।

🎬 टोन और ट्रीटमेंट: बिना फिल्टर की जासूसी

धुरंधर का ट्रीटमेंट बेहद रॉ है। यहाँ कोई स्लो-मो हीरोइज़्म नहीं, कोई पंचलाइन-बाज़ी नहीं। एक्शन सीक्वेंस छोटे, तेज़ और जानलेवा हैं। भाषा सख्त है, हिंसा असहज करती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

फिल्म में:

  • आतंकी फंडिंग
  • अवैध हथियार नेटवर्क
  • माफिया–राजनीति–एजेंसी नेक्सस
  • सीमा पार से संचालित स्लीपर सेल
  • जाली नोट का कारोबार

जैसे मुद्दे कहानी का हिस्सा बनकर आते हैं, भाषण बनकर नहीं।

Sanjay Dutt as SP Aslam in Dhurandhar
Sanjay Dutt as SP Aslam in Dhurandhar

🌟 अभिनय: फिल्म की असली रीढ़

  • रणवीर सिंह अपने करियर के सबसे नियंत्रित और इंटेंस अभिनय में हैं। हमज़ा/जसकीरत के दोहरे अस्तित्व को वे आंखों और बॉडी लैंग्वेज से निभाते हैं।
  • अक्षय खन्ना का रहमान डकैत शांत लेकिन खौफनाक है, बिना ज़्यादा डायलॉग के भी डर पैदा करता हुआ। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस विस्फोटक है, साथ ही डांस तो वायरल है ही।
  • आर. माधवन अपने किरदार में ठहराव और रणनीतिक गंभीरता लाते हैं। उनके व्यक्तित्व में आपको सब्र और विजन दिखाई देता है, भारत के गोपनीय विभाग के चीफ के रूप में वह खूब जमे हैं।
  • संजय दत्त और अर्जुन रामपाल दोनों ही अपने-अपने ग्रे जोन में असर छोड़ते हैं। अर्जुन के पात्र को देखकर आप उससे नफ़रत करने लगते है। जमील जमाली के किरदार में राकेश बेदी ने तहलका मचा दिया है, व्यंग्य और कमीनेपन का चलता फिरता सर्टिफ़िकेट उन्हें दिया जा सकता हैं। बिलकुल गजब!
  • सपोर्टिंग कास्ट: मानव गोहिल (सुषांत बंसल), सौम्या टंडन (उल्फत), गौरव घेरा (आलम, यह भी शानदार अभिनय की छाप छोड़ गए हैं), यह कहानी की दुनिया को विश्वसनीय बनाती है एवं अन्य किरदार भी अपनी छाप छोड़ने में सफल होते है।
Dhurandhar Movie Review
Dhurandhar Movie Review

📈 बॉक्स ऑफिस और फ्रेंचाइज़ पोटेंशियल

धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया है कि दर्शक अब मैच्योर, डार्क और रियलिस्टिक स्पाई सिनेमा को अपनाने के लिए तैयार हैं। फिल्म का एंड और इसका यूनिवर्स साफ तौर पर आगे के भाग की झलक छोड़ता है। फिल्म ने वर्ल्ड वाइड 850 करोड़ रुपये का व्यापार कर लिया है और इसके अभी काफी बढ़ने की उम्मीद है। फिल्म ऑल टाईम ब्लाॅकबस्टर की सूची में शुमार हो चुकी है जिसकी नींव भारत की राष्ट्रीयता और देशभक्ति जड़ो को जोड़ कर बनाई गई है।

📚 कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवेल की संभावना

धुरंधर ऐसी फिल्म है जिसे ग्राफिक नॉवेल के रूप में देखना हर कॉमिक्स प्रेमी का सपना होगा। रणवीर सिंह के हमज़ा किरदार को अगर बिग-साइज ग्राफिक नॉवेल ट्रीटमेंट मिले, तो यह भारतीय स्पाई कॉमिक्स के लिए एक नया अध्याय खोल सकता है।

Dhurandhar Movie By Aditya Dhar
Dhurandhar Movie By Aditya Dhar

इस दिशा में आदित्य धर जैसे क्रिएटर्स से उम्मीद जरूर की जानी चाहिए। डार्क आर्ट स्टाइल, सिनेमैटिक पैनल्स और सीमित रंगों में उतारा जाए, तो यह भारतीय स्पाई कॉमिक्स के लिए गेम-चेंजर बन सकता है।

✍️ अंतिम शब्द

धुरंधर उन गुमनाम योद्धाओं को सलाम है, जिनके नाम कभी इतिहास में नहीं लिखे जाते, लेकिन जिनकी वजह से इतिहास सुरक्षित रहता है।

DHURANDHAR 2025
DHURANDHAR 2025

यह फिल्म शोर नहीं मचाती, यह आपके भीतर उतरती है। अगर आप गंभीर, इंटेंस और सोचने पर मजबूर करने वाली स्पाई फिल्में पसंद करते हैं, तो धुरंधर मिस नहीं करनी चाहिए। धुरंधर की पूरी टीम को काॅमिक्स बाइट की हार्दिक शुभकामनाएं और आशा है धुरंधर ‘रिवेंज’ भी मार्च 2026 को बाॅक्स ऑफिस रिकार्ड्स ब्रेक करेगी। हिंदी सिनेमा के हीरों की खान में धुरंधर “कोहिनूर” से कुछ कमतर कही नहीं जा सकती है, अगर अभी पाठकों और दर्शकों ने इसे नहीं देखा है तो मौका भी है और दस्तूर भी! देख आईए पर सिर्फ व्यस्क जनों के लिए। आभार – काॅमिक्स बाइट!!

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2 thoughts on “धुरंधर रिव्यू: भारत के गुमनाम जासूसों को सलाम करती एक दमदार फिल्म (Dhurandhar Review: A Gritty Tribute to India’s Unsung Spies)

  • Arvind kumar Sahu

    बहुत खूब

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