लघुकथा: क्रिसमस का तोहफा
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क्रिसमस का तोहफा – एक दिल छू लेने वाली क्रिसमस कहानी।

जिंगल बेल…
जिंगल बेल…
जिंगल ऑल द वे…
यह गाना क्रिसमस आने से पहले ही हम सब गुनगुनाने लगते थे। बचपन में हमें बताया जाता था कि क्रिसमस से एक दिन पहले यानी 24 दिसंबर की रात, अगर हम अपने तकिये के नीचे तोहफों की लिस्ट बनाकर रखेंगे, तो सेंटा क्लॉज आकर हमारी लिस्ट देखेंगे और हमें तोहफा देंगे।
वैसे यह सब बातें करके बचपन की याद आ गई, लेकिन यहाँ बात हमारी नहीं, रिया की हो रही है, जो इस कहानी की मुख्य पात्र है।
कहानी में आगे बढ़ते हुए बताते हैं कि रिया तोहफों की लिस्ट बना रही है, जो उसे सेंटा से माँगने हैं, क्योंकि दो दिन बाद क्रिसमस आने वाला था।
सुबह का समय था। रिया नाश्ता करने ब्रेकफास्ट टेबल पर आई, तो तब भी उसके हाथ में लिस्ट थी। नाश्ता न करने पर रिया की मम्मी ने उसे टोका, तो वह कहने लगी,
“मम्मी प्लीज़ मुझे डिस्टर्ब मत कीजिए, लिस्ट बनाने दीजिए।”
रिया की मम्मी: हाँ, बना लेना, लेकिन पहले नाश्ता तो कर लो।
रिया: लेकिन मम्मी…
अच्छा ठीक है, बना लो। — रिया के पापा (बीच में ही बात काटते हुए)
रिया: थैंक्यू पापा। पापा, मैं बहुत एक्साइटेड हूँ। परसों क्रिसमस है, सेंटा आकर मुझे गिफ्ट्स देंगे।
ऐसा कहकर रिया कमरे में चली जाती है।
रिया के कमरे में जाने के बाद उसकी मम्मी उसके पापा से कहती हैं,
“कितनी एक्साइटेड है वह क्रिसमस को लेकर। लेकिन अगर उसे गिफ्ट्स नहीं मिलेंगे, तब कितना उदास हो जाएगी… और सेंटा वो कहाँ से आएंगे?”
रिया के पापा: तुम चिंता मत करो, हम दोनों मिलकर उसका क्रिसमस स्पेशल बना देंगे। 24 दिसंबर की रात आती है। रिया नौ बजे के करीब अपने तकिये के नीचे लिस्ट रखकर सो जाती है।
रात को 11:30 बजे रिया के मम्मी-पापा चुपके से दबे पाँव उसके कमरे में आकर उसका कमरा गिफ्ट्स से भर देते हैं और कमरा सजा देते हैं। वहीं रिया के पापा जल्दी से सेंटा क्लॉज की ड्रेस पहन लेते हैं।
जैसे ही 12 बजते हैं, वे लोग रिया को उठाते हैं। रिया कच्ची नींद में आँखें मलते हुए थोड़ी-सी पलक झपक कर देखती है और फिर सो जाती है। उसके मम्मी-पापा उसे दोबारा नहीं उठाते और अपने कमरे में जाकर सो जाते हैं।
अगला दिन होता है।
रिया की आँखें जैसे ही खुलती हैं, वह सजे हुए कमरे को देखकर और ढेर सारे गिफ्ट्स देखकर खुशी से झूम उठती है। वह दौड़ते हुए बाहर जाती है, अपने मम्मी-पापा का हाथ पकड़कर उन्हें अपने कमरे में लाती है और सजा हुआ कमरा दिखाती है।
फिर वह बेड पर बैठकर गिफ्ट्स खोलने लगती है।
रिया के चेहरे पर खुशी देखकर उसके मम्मी-पापा भी बहुत खुश हो जाते हैं।
गिफ्ट्स खोलते-खोलते रिया बताती है कि रात उसके पास सेंटा क्लॉज भी आए थे और उन्होंने उसे नींद से उठाया भी था। यह सुनकर उसके मम्मी-पापा एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुरा देते हैं।
और इसी के साथ रिया का क्रिसमस डे बहुत अच्छा गुजरता है।
कहानी का अंत इस बात के साथ होता है कि हमारे माँ-बाप ही हमारे लिए असली सेंटा क्लॉज होते हैं, जो हमारी खुशियों का ख्याल रखते हैं और हमसे बहुत प्यार करते हैं।
नाम : इशिका चौधरी
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