काॅमिक्स बाइट रिव्यू: फौलादी सिंह और तबाही के दूत (Comics Byte Review: Fauladi Singh Aur Tabahi Ke Doot)
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फौलादी सिंह की एक क्लासिक साइंस-फिक्शन डायमंड कॉमिक्स। (A Classic Science-Fiction Diamond Comics Of Fauladi Singh.)

भारतीय कॉमिक्स का स्वर्णिम दौर अपने आप में एक अलग ही दुनिया था जहां देसी सुपरहीरोज़ सिर्फ चोर-डाकुओं से नहीं, बल्कि आतंकवादियों, माफिया, ड्रग लॉर्ड्स और यहां तक कि अंतरिक्ष से आए खतरों से भी भिड़ते थे।
फौलादी सिंह इसी दौर के सबसे पुराने और लोकप्रिय सुपरहीरोज़ में से एक था। अपने छोटे साथी ‘लंबू’ और मार्गदर्शक डॉ. जॉन के साथ उनकी टीम ने अनगिनत मिशनों में दुनिया को बचाया है। उनकी कहानियों में फ्यूचर्सिटिक एलिमेंट, रोबोट्स और वैज्ञानिक प्रयोगों की झलक साफ दिखाई देती है।

डायमंड कामिक्स की यह प्रस्तुति “फौलादी सिंह और तबाही के दूत” उसी विरासत को आगे बढ़ाती है जहां विज्ञान की एक गलती पूरी मानवता पर भारी पड़ती है और वर्तमान में भी वैसी ही बनी हुई हैं।
टीम (Team)
- फौलादी सिंह – भारत के शुरुआती सुपरहीरोज़ में से एक, जो हर मुश्किल मिशन में आगे रहता हैं और उनसे देशवासियों की रक्षा करता है।
- लंबू – फौलाद का भरोसेमंद साथी, जो अपने छोटे कद के बावजूद बड़े काम करता है।
- डॉ. जॉन – वैज्ञानिक और फौलाद एवं लंबू के मेंटर, जिनकी बुद्धिमत्ता इस मिशन की असली कुंजी बनती है।
- सुशांत – भारतीय वैज्ञानिक, जिसका अपहरण होता है लेकिन वही इस मुसीबत का समाधान खोजने में मदद करता है।
- नोवार्स्की (सोवियत प्रमुख वैज्ञानिक) – रिसर्च सेंटर के प्रमुख, जो इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं।

कहानी (Story)
कहानी की शुरुआत एक विशाल रेगिस्तान से होती है, जहां सोवियत वैज्ञानिक एटम बम परीक्षणों के प्रभाव का अध्ययन कर रहे होते हैं और उसमे एक सुशांत नाम का भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल है। खुदाई के दौरान उन्हें कुछ अजीबोगरीब नीले गुब्बारे (अंडे) मिलते हैं।

जैसे ही एक गुब्बारे को चोट लगती है, उसमें से निकले छोटे लाल बीज तेजी से बढ़कर विशाल, उड़ने वाले डायनासोर जैसे खतरनाक जीवों में बदल जाते हैं। ये जीव गोलियों, टैंकों और बमों से भी अप्रभावित रहते हैं। वे वैज्ञानिक सुशांत का अपहरण कर लेते हैं और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाते हैं। नोवार्स्की अपने प्रयास से सुशांत को जैसे तैसै बचा लेता है लेकिन देखते ही देखते ये खतरा सीमाएं पार कर भारत तक पहुंच जाता है और सीमावर्ती इलाके में दहशत फैल जाती है।

जब भारतीय सेना भी इन जीवों को रोकने में असफल हो जाती है, तब आर्मी चीफ डॉ. जॉन और उनकी टीम को बुलाते हैं। डॉ. जॉन, फौलादी सिंह और लंबू के साथ इस रहस्य की जांच शुरू करते हैं। सुशांत से मिली जानकारी और वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि ये जीव अत्यधिक गर्मी में पनपते हैं (क्योंकि इनका जन्म परमाणु परीक्षण क्षेत्र में हुआ है) और अत्यधिक ठंड इनके लिए घातक है।

इसके बाद सेना “आइस बॉम्ब” और हेलीकॉप्टर से ठंडे पानी की बौछार का इस्तेमाल करती है, जिससे इन जीवों को जमाकर बेहोश कर दिया जाता है। अंत में इन्हें साइबेरिया भेजकर बर्फ में दफना दिया जाता है ताकि वे दोबारा जाग न सकें।
कॉमिक्स का विवरण (Comic Book Details)
- प्रकाशक: Diamond Comics Pvt. Ltd.
- अंक संख्या: D-1816
- कीमत: ₹15.00
- संपादक: गुलशन राय
- लेखक: गंगा प्रसाद शर्मा
- चित्रकार: भारत मकवाना
काॅमिक्स बाइट का निष्कर्ष (Comics Byte Take)
यह कॉमिक्स एक बेहतरीन साइंस-फिक्शन आइडिया पर आधारित है जहां परमाणु परीक्षणों का असर खतरनाक जीवों के रूप में सामने आता है। कहानी का प्रेज़ेंटेशन काफी एंगेजिंग है और उस दौर की कल्पनाशीलता को दर्शाता है।

लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि इस कॉमिक्स में फौलादी सिंह का कोई बड़ा एक्शन सीन नहीं है, जबकि आवरण में फौलाद को पूरी तरह से एक्शन ओरिएंटेड दिखाया गया है।
इस बार असली हीरो बनकर उभरते हैं डॉ. जॉन, जो अपनी वैज्ञानिक सोच से पूरी समस्या का हल निकालते हैं। यह एक अलग तरह का नैरेटिव है, जो कॉमिक्स को खास बनाता है, लेकिन फौलादी सिंह के फैंस को थोड़ा निराश भी कर सकता है।

चित्रांकन की बात करें तो श्री भारत मकवाना का काम शानदार है। तुलसी काॅमिक्स में “जंबू” जैसे किरदार पर काम कर चुके मकवाना जी का आर्ट यहां भी प्रभाव छोड़ता है। गंगा प्रसाद शर्मा जी ने भी फौलादी सिंह के कहानीयों को ध्यान में रखते हुए ही एक सम-सामयिक मुद्दें पर अच्छी कहानी गढ़ी है।

कॉमिक्स में कई विज्ञापन भी शामिल हैं, जो उस दौर की पब्लिशिंग स्टाइल और नॉस्टैल्जिया को और मजबूत बनाते हैं। कुल मिलाकर, यह एक मनोरंजक और अलग तरह का फौलादी सिंह एडवेंचर है, जिसे हर क्लासिक कॉमिक्स प्रेमी को जरूर पढ़ना चाहिए। आभार – काॅमिक्स बाइट!!




