विश्व हिंदी दिवस पर दिल्ली पुस्तक मेले में कॉमिक्स और किताबों का महाकुंभ। (World Hindi Day Meets World Book Fair – India’s Biggest Celebration of Books & Comics)
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विश्व हिंदी दिवस पर किताबों की दुनिया में खो जाने का सबसे सही मौका – दिल्ली पुस्तक मेला। (The biggest book & comics festival of India is calling you.)

10 जनवरी: एक ऐसा दिन, जो हर हिंदी प्रेमी के लिए किसी उत्सव से कम नहीं और जब यही दिन दिल्ली के विश्व प्रसिद्ध पुस्तक मेले से जुड़ जाए, तो वह सिर्फ एक तारीख नहीं रहती बल्कि वह संस्कृति का पर्व बन जाती है। विश्व हिंदी दिवस हमें हमारी भाषा के योगदान की याद दिलाता है, और दिल्ली का विश्व पुस्तक मेला उसी यथार्थ को आँखों के सामने साकार कर देता है।

प्रगति मैदान में चल रहा यह पुस्तक मेला (10–18 जनवरी) केवल किताबों की प्रदर्शनी नहीं है अपितु भारत का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है।
यहाँ एक ही छत के नीचे आपको मिलती हैं —
- कहानी, साहित्य, ज्ञान और कल्पना
- बच्चों की परीकथाएँ
- युवाओं के ग्राफिक नॉवेल्स
- और कॉमिक्स की वो दुनिया, जिसने हम सबको पढ़ने से प्यार करना सिखाया




राज कॉमिक्स (संजय गुप्ता), राज कॉमिक्स (मनोज गुप्ता), शक्ति कॉमिक्स, अमर चित्र कथा, फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन्स जैसे दिग्गज प्रकाशन अपने नए और क्लासिक टाइटल्स के साथ यहाँ मौजूद हैं।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती।
इस मेले में 1000 से अधिक प्रकाशन भाग ले रहे हैं।
कई देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने कल्चर, भाषा और साहित्य के साथ यहाँ आते हैं। यही कारण है कि यह मेला बुक फेयर नहीं, एक ग्लोबल कल्चरल फेस्टिवल बन जाता है।
और सोचिए…
विश्व हिंदी दिवस के दिन, हिंदी किताबों और कॉमिक्स के समुद्र के बीच खड़ा होना,भला इससे बेहतर और क्या हो सकता है?

सच तो यह है कि:
हमारी हिंदी इतनी मजबूत इसलिए बनी, क्योंकि हमने बचपन में कॉमिक्स पढ़े। नागराज, ध्रुव, परमाणु, चाचा चौधरी, अकबर–बीरबल, तेनालीराम…इन्हीं से हमने शब्द सीखे, वाक्य बनाए और कल्पनाओं को उड़ान दी।”
आज भी क्या आप कॉमिक्स पढ़ते हैं? किताबों की खुशबू से प्रेम करते है!
अगर हाँ,,तो यह मेला आपके लिए है।
और अगर नहीं तो यही वह जगह है जहाँ दोबारा शुरुआत की जा सकती है।
📍 स्थान: प्रगति मैदान, नई दिल्ली
📅 तारीख: 10–18 जनवरी
🎉 एंट्री: हर किताब प्रेमी के लिए खुला आमंत्रण
एक दिन निकालिए…
और खुद को किताबों की उस दुनिया में ले जाइए,
जहाँ शब्द सिर्फ पढ़े नहीं जाते, महसूस किए जाते हैं।
आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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