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राजू की यात्रा – डर से आत्मविश्वास तक। (A magical tale that teaches children to believe in themselves.)

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कहानी: अपनी शक्ति को पहचानो – राजू और परी की प्रेरणादायक कथा। (Raju and the Fairy: A Heart-Warming Story About Discovering Your Inner Strength)

Raju Aur Jadui Pari
Raju Aur Jadui Pari

जादुई परी (Jadui Pari)

राजू एक बहुत ही प्यारा, समझदार और सबकी मदद करने वाला बच्चा था लेकिन इसके बावजूद राजू का कोई सच्चा दोस्त नहीं था सब उसकी मजाक उड़ाते थे यहां तक कि उसके माता-पिता भी उसको हर समय बस डांटते रहते थे क्योंकि राजू पढ़ने में कमजोर था। राजू स्कूल में किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेता था, हर बार परीक्षा में उसके नंबर कम आते थे और एक बार तो वह चौथी कक्षा में फेल भी हो गया था।

राजू अब छठी कक्षा में पढ़ रहा था लेकिन उसके माता-पिता और स्कूल के सारे शिक्षकों को उससे कोई उम्मीद नहीं थी। बेचारा राजू आज भी हर बार की तरह अपने पिता की डांट खाकर स्कूल लिए चला जाता है। कक्षा में टीचर सबसे सवाल पूछ रहे थे और सब टीचर को उनके प्रश्न पूछने पर सही उत्तर भी दे रहे थे। सब से पूछने पर राजू का नंबर भी आया लेकिन राजू टीचर के प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाया जवाब ना देने पर टीचर ने राजू को क्लास से बाहर निकाल दिया। टीचर के कहने पर राजू बाहर जाकर खड़ा हो जाता है। थोड़ी देर में लंच की घंटी बजती है. घंटी बजने पर टीचर क्लास से बाहर चले जाते हैं और राजू भी क्लास में वापस आ जाता है और जैसे ही वह सीट पर बैठने चलता है तो शम्भू ( राजू का सहपाठी ) कुर्सी पीछे कर देता है और राजू नीचे गिर जाता है. राजू के नीचे गिरने पर सब उस पर हंसने लगते हैं. शम्भू के ऐसा करने पर राजू को गुस्सा आ जाता है और वह उठकर शम्भू को धक्का दे देता है उस पर चिल्लाने लगता है और फिर दोनों की लड़ाई हो जाती है. लड़ाई का शोर-शराबा सुनकर मास्टर दयाल जी उनकी क्लास में आते हैं और उनकी लड़ाई बंद करवाते हैं. लड़ाई बंद होने के बाद मास्टर दयाल जी उनसे लड़ाई करने का कारण पूछते हैं. मास्टर जी के पूछने पर सब चुप्पी साध लेते हैं. सबकी चुप्पी देखकर मास्टर जी उनसे कहते हैं कि अगर किसी ने नहीं बताया तो वह कल सुबह ही सबके माता-पिता को बुलाकर उनकी शिकायत करेंगे।

यह सुनकर सारे बच्चे डर जाते हैं तभी एक बंटी नाम का लड़का मास्टर जी को सारी बात बता देता है. बंटी की बात सुनकर मास्टर जी शम्भू को डांटते हैं और उसे क्लास से बाहर निकाल देते हैं. थोड़ी देर बाद स्कूल की छुट्टी हो जाती है और सभी पैदल चलकर अपने घर जा रहे होते हैं. राजू आगे चल रहा होता है. राजू के पीछे-पीछे शम्भू भी चल रहा होता है. शम्भू के साथ उसका दोस्त चिंटू भी होता है. शम्भू और चिंटू क्लास में जो हुआ उसके बारे में बात कर रहे होते हैं. चिंटू शम्भू से कहता है।

चिंटू : यार आज क्लास में जो हुआ वह ठीक नहीं हुआ 

शम्भू : हम्म 

चिंटू : इसमें तुम्हारी कोई ग़लती नही थी लेकिन फिर भी तुम्हें इस राजू की वजह से डांट पड़ी और टीचर ने क्लास से बाहर भी निकाल दिया 

शम्भू : सही कह रहा है तू चिंटू, इस राजू की वजह से मुझे क्लास से बाहर निकाल दिया और डांट भी पड़ी, मैं इससे इस बात का बदला जरूर लूंगा और इसको सबक सिखाऊंगा।

अगला दिन होता है। सभी स्कूल जा रहे होते हैं। राजू स्कूल के अंदर घुसने ही वाला होता है तभी उसके पास शम्भू और चिंटू आ जाते हैं. उन दोनों को देखकर राजू का माथा चढ़ जाता है और वह उन दोनों को अनदेखा करके जाने लगता है तभी पीछे से शम्भू उसका स्कूल बैग खींचता है. शम्भू के ऐसा करने पर राजू को गुस्सा आ जाता है और वह उससे कहता है।

राजू : शम्भू ये क्या बदतमीजी है. मुझे अंदर जाने दे 

शम्भू : राजू मैं कल के लिए माफ़ी मांगना चाहता हूं 

राजू ( अपना बैग छुड़ाते हुए ) : माफ़ी किस बात की? मुझे तुम दोनों से बात नहीं करनी 

शम्भू : कल जो क्लास में हुआ उसके लिए मुझे माफ़ कर दो प्लीज़

राजू ( बिना मन के ) : हां ठीक है मैं तुझसे गुस्सा नहीं हूं. कोई बात नहीं 

शम्भू : तू सच बोल रहा है ना 

राजू : हां 

शम्भू : चल ठीक है फिर आज से हम दोस्त हैं 

राजू : दोस्त 

शम्भू : हां अब तू मैं और चिंटू तीनों दोस्त बन जाते हैं।

शम्भू की बात सुनकर राजू को यकीन नहीं होता है वह शांत रहता है तभी चिंटू राजू को समझाता है।

चिंटू : राजू शम्भू को सच में अपनी ग़लती का अहसास है और हम दोनों सच में तुझसे दोस्ती करना चाहते हैं. हम आज पूरा दिन खेलेंगे, क्लास में साथ बैठेंगे और फिर स्कूल की छुट्टी के बाद घूमने चलेंगे।

चिंटू की बात सुनकर राजू शम्भू को माफ कर देता है और उन दोनों से दोस्ती कर लेता है फिर वह तीनों क्लास में चले जाते हैं. तीनों एक ही बड़ी सी सीट पर साथ बैठते हैं. लंच की घंटी बजने पर तीनों साथ में लंच करते हैं. शम्भू और चिंटू अपना खाना राजू के साथ बांटते हैं साथ ही राजू भी अपना लंच उनके साथ मिल-बांटकर खाता है. करीब आधा घंटे बाद छुट्टी की घंटी बज जाती है सभी अपने घर जाने लगते हैं. राजू भी अपने घर जाने लगता है तभी शम्भू और चिंटू पीछे से आकर उसको रोकते हैं. उन दोनों के रोकने पर राजू उनसे पूछता है।

राजू : क्या हुआ?

शम्भू : अरे तू भूल गया चिंटू और मैंने सुबह तुझे बताया तो था कि आज हम तीनों साथ घूमने भी चलेंगे 

राजू ( याद करते हुए ) : अरे हां याद आया लेकिन आज नहीं किसी ओर दिन चलेंगे 

चिंटू : नहीं यार चल ना 

राजू : नहीं आज नहीं 

शम्भू : आज ही तो हम दोनों दोस्त बने हैं और तू अब भी मना कर रहा है. चल ना यार 

चिंटू : हां चल ना राजू तुझे बहुत मज़ा आएगा।

उन दोनों के ज्यादा कहने पर राजू चलने के लिए राजी हो जाता है। शम्भू और चिंटू पहले राजू को लेकर बाजार घूमने जाते हैं और फिर चलते-चलते एक कॉलोनी की तरफ निकल पड़ते हैं। उन लोगों को घूमते-घूमते बहुत देर हो जाती है तभी राजू उन दोनों से कहता है कि अब बहुत देर हो गई है उन लोगों को घर चलना चाहिए। यह सुनकर शम्भू राजू से कहता है कि वो घबराएं नहीं वह तीनो साथ में है. शम्भू की बात सुनकर राजू घबराए हुए आगे चल रहा होता है उसके थोड़ी पीछे ही शम्भू और चिंटू चल रहे होते हैं। चलते-चलते चिंटू शम्भू से कहता है।

चिंटू : यार शम्भू बहुत देर हो गई हमने राजू को सबक सिखाने के लिए कुछ किया ही नहीं ऐसे तो सारा टाइम यूं नहीं निकल जाएगा 

शम्भू : तू सही कह रहा है. मैं भी राजू को सबक सिखाने के बारे में ही सोच रहा हूं।

चलते-चलते कुछ दूरी पर एक घर के बाहर उन्हें एक कुत्ता दिखाई देता है। कुत्ते को देखकर शम्भू के दिमाग में एक आइडिया आता है। राजू आगे चल रहा होता है उसके थोड़ी सी दूर पीछे ही शम्भू और चिंटू चल रहे होते हैं। शम्भू को सड़क पर एक छोटा सा कंकड़ पड़ा दिखाई देता है और वह उसको उठा देता है जैसे ही राजू उस घर के बाहर से निकलता है जहा कुत्ता होता है शम्भू कुत्ते को कंकड़ मार देता है। कंकड़ लगने पर कुत्ता आगे चल रहे राजू पर भौंकने लगता है। कुत्ते का भौंकना सुनकर और उसे अपनी ओर आता हुआ देखकर राजू घबराने लगता है और वह तेज आवाज मारते हुए शम्भू चिंटू से मदद मांगने लगता है। शम्भू और चिंटू तेज आवाज मारकर उससे ना घबराने को कहते हैं और उसकी मदद करने का झूठा नाटक करने के लिए इधर-उधर डंडा ढूंढने लगते हैं। कुत्ता जोर-जोर से भौंककर राजू की ओर चलने लगता है। कुत्ते को आता हुआ देखकर राजू वहां से भाग जाता है और कुत्ता भी उसके पीछे भाग जाता है। यह सब देखकर शम्भू और चिंटू खुश हो जाते हैं और वापस दोनों साथ में वहां से घर चले जाते हैं।

वहीं दूसरी ओर राजू भागता हुआ एक सुनसान इलाके की तरफ जंगल में आ जाता है और एक बड़े पेड़ के पीछे छुप जाता है। दो मिनट रूककर फिर वह पेड़ से झांककर आगे की ओर देखता है तो वहां उसे कुत्ता नहीं दिखाई देता तभी वह चारों तरफ देखता है तो उसे पता चलता है कि वह काफी दूर आ गया है। राजू उस पेड़ के पीछे से निकलकर बाहर आकर आगे सड़क की ओर चलने लगता है लेकिन चारों तरफ बस उसे बड़े-बड़े पेड़ दिखाई देते हैं और चारों तरफ बिल्कुल सन्नाटा होता है। राजू बीच जंगल की सड़क पर खड़े होकर चारों दिशाओं में देखने लगता है। थोड़ी देर तक चारों दिशाओं में देखने के बाद वह दक्षिण दिशा की तरफ चल पड़ता है। चलते-चलते उसे बहुत देर हो जाती है और वह बहुत थक भी जाता है। राजू को बहुत प्यास भी लग रही होती हैं तभी राजू की नजर एक तालाब पर पड़ती है और वह उस तालाब के पास चला जाता है। राजू तालाब की ओर देखता है जिसका पानी बहुत साफ होता है। राजू अपनी वॉटर बॉटल से पानी को भरता है और फिर पानी पीता है। पानी पीकर राजू वहीं तालाब के किनारे से बस थोड़ी ही दूर एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है। राजू को अपने घर और अपने माता-पिता की याद आने लगती है और उसकी आंखों में आसूं आने लगते हैं। राजू जोर-जोर से रोने लगता है और भगवान से मदद मांगने लगता है तभी उसे एक आवाज सुनाई देती है। आवाज़ सुनकर वह घबरा जाता है और खड़ा होकर अपने आंसू पोंछकर इधर-उधर देखने लगता है। तभी उसे एक आवाज सुनाई देती है। आवाज़ सुनकर वह घबरा जाता है और खड़ा होकर अपने आंसू पोंछकर इधर-उधर देखने लगता है। इधर-उधर देखने पर राजू की नजर तालाब पर पड़ती है जिसमें अजीब सी हलचल हो रही होती हैं और बुलबुले निकल रहे होते हैं। यह सब देखकर राजू घबरा जाता है और तालाब के ज्यादा बिल्कुल किनारे के पास चला जाता है तभी उसमें से एक बड़ी पानी की लहर चारों दिशाओं में फैल जाती है और चमकती हुई चीज निकलती है।

राजू उन पानी की लहरों से अपना बचाव करते हुए वापस पेड़ के पास चला जाता है और जो बहुत तेज चमकने वाली चीज को देख नहीं पा रहा होता है और वह उसकी आंखों में लग रही होती हैं तभी वह अपने हाथों से अपनी आंखों को ढंकता है और पूछता है कि ” कौन है “? थोड़ी देर बाद उजाला कम होता है और राजू को एक आवाज आती है। राजू अपनी आंखों से हाथों को हटाते हुए सामने देखता है तो सामने एक सुंदर सी परी खड़ी हुई होती हैं। राजू परी को देखकर पीछे उल्टे कदम चलने लगता है तभी परी राजू से कहती हैं ” डरो नहीं मेरे पास आओ ” परी के बुलाने पर राजू घबराने लगता है और मना कर देता है। राजू की बात सुनकर परी और प्यार से कहती हैं ” आओ मेरे पास आओ मैं तुम्हें कोई नुक़सान नही पहुंचाऊंगी “। परी के इतने प्यार से बोलने पर राजू को परी पर भरोसा होता है और वह परी के पास तालाब के ज्यादा किनारे चला जाता है। परी तालाब के पानी के बीच में खड़ी होती है। राजू के पास आकर खड़े होने पर परी राजू से पूछती है ” कौन हो तुम? और यहां कैसे आएं? ” परी के इतने प्यार से पूछने पर राजू अपने साथ हुई सारी बात बता देता है और बताते हुए उसकी आंखों में आसूं आने लगते हैं। राजू की आंखों में आसूं देखकर परी उससे कहती हैं ” चुप हो जाओ रोओ मत “। राजू अपने आंसू पोंछते हुए कहता है ” मैं यहां आ तो गया गलती से भागकर लेकिन अब मुझे रास्ता नहीं मिल रहा है मैं ओर खो गया हूं “

परी : डरो नहीं मैं हूं ना, मैं जानती हूं तुम्हें अपने घर की अपने माता-पिता की याद आ रही होगी और वह लोग भी तुम्हें ढूंढ रहे होंगे तुम्हारी चिंता कर रहे होंगे 

राजू ( उदास मन से ) : हां मुझे मेरे घर की मेरे मम्मी-पापा की याद आ रही है लेकिन मैं जानता हूं वह लोग मुझे याद नहीं कर रहे होंगे।

राजू की बात सुनकर परी को थोड़ा आश्चर्य होता है और वह राजू से कहती हैं ” ऐसा क्यों बोल रहे हो? तुम तो कितने प्यारे हो। क्या तुम्हारा उनसे झगड़ा हुआ है?

राजू ( आंखों में आसूं आते हुए ) : नहीं कोई झगड़ा नहीं हुआ है 

परी : तो फिर क्या बात है? बताओ मुझे 

राजू : मुझसे कोई प्यार नहीं करता, मम्मी-पापा तो बिल्कुल भी नहीं यहां तक कि मेरा कोई दोस्त भी नहीं है 

परी : नहीं ऐसे नहीं कहते सब तुमसे प्यार करते हैं बस तुमको नहीं पता है 

राजू : नही मैं सच बोल रहा हूं मुझसे कोई प्यार नहीं करता है 

परी : ऐसा क्यों?

राजू : क्योंकि मैं पढ़ाई में कमजोर हूं. मेरे नंबर हमेशा कम आते हैं और एक बार तो मैं फेल भी हो गया था इसलिए सब मुझसे दूर रहते हैं कोई मुझसे प्यार नहीं करता ( रोते हुए )

परी : नहीं रोते नहीं चुप हो जाओ और यह तो बहुत छोटी सी समस्या है इसका हल भी तुम्हारे पास ही है.

राजू : मेरे पास 

परी : हां तुम्हारे पास 

राजू : वो कैसे?

परी : राजू तुम बहुत प्यारे बच्चे हो तुम्हारे अंदर भी बाकि बच्चों की तरह अच्छी खूबियां हैं और ताकत तो उन बच्चों से भी बहुत ज्यादा है.

राजू : नहीं मैं बुद्धू हूं मेरे अंदर कोई ताकत नहीं है 

परी : नहीं राजू तुम्हारे अंदर साफ मन की ताकत है तुम्हारा मन साफ है इसलिए तुम बाकी सभी बच्चों से अलग हो बस तुम अपने अंदर नही देख पा रहे हो 

राजू : नहीं ऐसा कुछ नहीं है मेरे अंदर ऐसी कोई खूबी नहीं है।

परी राजू को बहुत समझाने की कौशिश करती है लेकिन राजू परी की बातों को बिलकुल नहीं समझता है और अपने अंदर खामियां निकालता रहता है. परी मन-ही-मन सोचती है कि वह कैसे राजू को उसके अंदर की शक्ति का अहसास दिलवाएं। राजू अचानक से परी की तरफ देखता है तो उसे सामने सुंदर परी एक ख़तरनाक बड़े नाखून और दांतों वाली चुड़ैल के रूप में बदलती हुई नजर आ रही थी, परी के सफेद कपड़े अब गंदे काले कपड़ों में बदल गये और परी के हाथों में जो छड़ी थी वह छड़ी अब एक कंकाल खोपड़ी के रूप में बदल गई। यह सब देखकर राजू बहुत डर गया और कांपने लगा। राजू ने देखा कि वह खतरनाक परी उसकी तरफ आ रही है यह देखकर राजू भागने लगा। राजू तीन-चार कदम भागा ही था कि गिर गया। गिरने पर उसने पिछे मुड़कर देखा तो उससे दो कदम दूर वह खतरनाक परी हवा में उड़ रही थी और जोर-जोर से हंस रही थी। राजू उसको हंसता हुआ देखकर घबराने लगा और कहा – ” कौन हो तुम? और वह सुंदर परी कहां गयी?” 

खतरनाक परी : वह परी सिर्फ उनसे मिलती है जो बच्चे पढ़ते हैं, समझदार होते हैं, अपने माता-पिता की बात मानते हैं लेकिन तुम… तुम एक बुद्धू बच्चे हो, ना तुम पढ़ते हो ना लिखते हो, तुम अपने माता-पिता का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करते और ना ही तुम्हारे अंदर कोई खूबियां हैं. तुम्हारे जैसे बच्चों को मैं अपने साथ अपने बुरे लोक में ले जाती हूं, मैंने बहुत बुरे बुरे बच्चों को सबक सिखाया है अपने साथ ले गयी हूं और अब तुम्हारी बारी है ( हाहाहाहाहा )। और ऐसा कहकर वह खतरनाक परी जोर जोर से हंसने लगती है।

राजू ( घबराकर और कांपते हुए ) : तुम्हें.. तुम्हे कै.. कैसे पता और क्या ही पता मेरे बारे में, मैं कोई बुद्धू बच्चा नहीं हूं. मैं बहुत अच्छी ड्राइ… ड्राइंग करता हूं और जब छोटा था तो क्लास में ड्राइंग कॉम्पीटिशन में फर्स्ट आता था.. हां दूर रहो तुम जाओ यहां से।

खतरनाक परी अपनी खोपड़ी वाली छड़ी से एक बड़ा काला सा जादू का गोला बनाकर राजू की तरफ फेंक देती है। अपनी तरफ गोला आता देखकर राजू दूसरी तरफ करवट ले लेता है और उसका हाथ एक ईंट पर पड़ता है और वह जल्दी से ईंट उठाकर उस खतरनाक परी को मार देता है। ईंट खतरनाक परी के हाथ पर बड़े जोर से लगती है और उसकी खोपड़ी वाली छड़ी गिर जाती है साथ में खतरनाक परी भी निचे जमीन पर गिर जाती है। खतरनाक परी के हाथ में खरोंच भी आ जाती है और वह परी अपने पहले वाले रूप में आ जाती है। राजू यह देखकर आश्चर्यचकित हो जाता है और खड़ा होकर कहता है ” आप ” ? आपने मुझे डराया

परी : हां ( गिर गई थी फिर जमीन पर बैठते हुए )

राजू : आपने ये ग़लत किया है मैंने आपको अपनी सारी बात बताई और आपने मुझे डराया 

परी : यह सब मैंने तुम्हारे लिए ही तो किया है राजू क्योंकि तुम अपनी शक्ति को देख ही नहीं पा रहे थे 

राजू : मतलब… कैसी शक्ति 

परी : जब मैंने खतरनाक रूप लिया तो तुम डर कर भागने लगे ठीक इसी तरह तुम्हें बुराई से दूर रहना चाहिए और जब मैंने जादू का गोला तुम्हारे ऊपर फेंका तो तुम अपनी सूझबूझ से कैसे बच गए ठीक इसी तरह तुम्हें अपनी सूझबूझ से पढ़ाई करके अच्छे नंबर लाने है और तुमने खुद ही तो बोला कि तुम कितनी अच्छी ड्राइंग करते हो और जब छोटे थे तो फर्स्ट आते थे. देखा तुम्हारे अंदर कितनी खूबियां हैं।

परी की बातें सुनकर राजू को जोश आता है और उसे अपने अंदर विश्वास सा होने लगता है। राजू परी के पास आकर अपने हाथ का सहारा देकर परी को उठाता है और जो उसने ईंट मारी उसके लिए माफ़ी मांगता है। परी राजू से कहती हैं – मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूं राजू बस तुम्हें मुझसे एक वादा करना होगा 

राजू : क्या वादा ?

परी : वादा करो कि तुम अब निराश नहीं रहा करोगे और अपने अंदर की सारी कमियों को अपनी खूबियों में बदल लोगे 

राजू : हां मैं वादा करता हूं मैं खूब मेहनत करूंगा 

परी : शाबाश, देखो राजू अब थोड़ी देर में रात होने वाली है और तुम्हारे मम्मी-पापा भी तुम्हारी बहुत फिक्र कर रहे होंगे अब तुम्हें जाना चाहिए

राजू : लेकिन कैसे जाऊं मुझे तो रास्ता मालूम नहीं मैं भूल गया हूं 

परी : कोई बात नहीं चिंता मत करो तुम मेरा हाथ पकड़ लो।

फिर राजू परी की ऊंगली पकड़ लेता है। परी राजू को लेकर उड़ जाती है और उड़ते-उड़ते जंगल के बाहर छोड़ देती है। परी राजू के सिर पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद देती है और उससे विदा लेकर उड़ते हुए जंगल में वापस चली जाती है। राजू परी को बाय बोलकर अपने घर चला जाता है।

अब पांच महीने बाद राजू के अंतिम वर्ष के एग्जाम का रिजल्ट आता है जिसमें राजू दूसरे नंबर पर आता है। राजू की स्कूल में सभी टीचर तारीफ करते हैं साथ ही राजू के माता-पिता भी उस पर बहुत गर्व महसूस करते हैं। शम्भू और चिंटू भी अब राजू के अच्छे दोस्त बन गए हैं और अब राजू एक बहुत ही पढ़ने वाला समझदार बच्चा बन गया।

अगर हम सब भी राजू की तरह अपने अंदर की शक्ति पहचान ले और अपने अंदर की कमियों को जाने तो हम भी राजू की तरह अच्छे बन जाएंगे।

कहानी की सीख

अगर हम भी राजू की तरह अपनी खूबियों को पहचान लें,
कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने की कोशिश करें,
तो हम भी राजू की तरह अच्छे इंसान बन सकते हैं।

नाम : इशिका चौधरी।

Ishika Choudhary

इशिका चौधरी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की रहने वाली एक प्रतिभाशाली युवा लेखिका हैं। उन्हें कविता और कहानियां लिखने का विशेष शौक है। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और वेब पोर्टल्स पर प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा उनकी कविताएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी छप चुकी हैं, जिनमें बच्चों के लिए लोकप्रिय “चिल्ड्रन पत्रिका” भी शामिल है। इशिका की रचनाओं में संवेदनशीलता, सरलता और जीवन के गहरे अर्थ झलकते हैं।

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