इंद्रजाल कॉमिक्स – बहादुर : कालुंगे के शैतान (Indrajal Comics – Bahadur: The Devil of Kalunge)
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कालुंगे के शैतान: एक्शन, रोमांच और अपराधियों से जंग (Kalunge ke Shaitan: A Tale of Action, Suspense & Crime)
भारतीय कॉमिक्स इतिहास में बहादुर का नाम एक खास जगह रखता है। इन्द्रजाल कॉमिक्स के इस लोकप्रिय नायक ने 70 और 80 के दशक में पाठकों को अपराध और आतंक से लड़ने की प्रेरणा दी। “कालुंगे के शैतान” (Kalunge ke Shaitan) बहादुर का एक ऐसा ही रोमांचक अंक है, जो 26 जून – 2 जुलाई, 1988 के बीच प्रकाशित हुआ था।

बहादुर – भारतीय जासूसी नायक (Bahadur – Indian Spy Hero)
बहादुर को 1970 के दशक में आबिद सुरती (Aabid Surti) ने गढ़ा और बाद में कई लेखकों व कलाकारों ने उसे आगे बढ़ाया। अपराध और आतंकवाद से जूझते इस किरदार ने भारतीय पाठकों को एक देसी हीरो दिया, जो बिना सुपरपावर के सिर्फ साहस, बुद्धिमानी और मार्शल आर्ट्स के बल पर अपराधियों से भिड़ता था।

कहानी की झलक: कालुंगे के शैतान
बहादुर को जानकारी मिलती है कि इक़बाल नामक व्यक्ति ने समुद्र तट पर मून शाइन होटल बनाया है। लेकिन उस होटल का इस्तेमाल अपराधियों के अड्डे के रूप में हो रहा है। बहादुर, इंस्पेक्टर रॉय और बेला मिलकर अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए योजना बनाते हैं। यह अपराधी गैंग इतना खतरनाक है कि अब तक कई निर्दोषों की जान ले चुका है। बहादुर अपनी टीम के साथ समुद्र तट पर पहुँचता है। वहां अपराधियों के गिरोह से उसका सीधा सामना होता है। कहानी में रोमांच, एक्शन और बहादुर की तेज़ सोच हर पन्ने पर झलकती है। इस गिरोह को खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन बहादुर अपनी जुझारू प्रवृत्ति और साहस के साथ उन्हें मात देने निकल पड़ता है।

कला और प्रस्तुति
- इस अंक का आर्ट प्रमोद ब्राम्निया जी ने तैयार किया था एवं कथा लिखी थी जगजीत उप्पल जी ने, आवरण में बहादुर अपराधियों को जोरदार कराटे किक मारते हुए दिखता है।
- अंदर के चित्रों में 80s के आर्टवर्क की झलक साफ दिखती है – चमकदार रंग, सशक्त चेहरे और एक्शन से भरपूर पैनल।
- संवादों में अपराध, रोमांच और बहादुर की सोच का सही संतुलन देखने को मिलता है।

बहादुर की खासियत
- कोई सुपरपावर नहीं, केवल साहस और दिमाग उसका असली हथियार है।
- अपराधियों को सबक सिखाने के साथ-साथ बहादुर समाज में शांति और न्याय कायम करने का संदेश देता है।
- यह कॉमिक्स युवाओं को बताती है कि असली हीरो वही है जो ज़मीन से जुड़ा हो और सच्चाई के लिए लड़े।
निष्कर्ष
“कालुंगे के शैतान” इन्द्रजाल कॉमिक्स का ऐसा अंक है, जिसे पढ़कर आप 80s के सुनहरे कॉमिक्स दौर में लौट जाएंगे। बहादुर का साहस, उसकी जाँच-पड़ताल की क्षमता और अपराधियों से लड़ाई आज भी उतनी ही रोमांचक लगती है जितनी प्रकाशन के समय थी।

अगर आप पुराने कॉमिक्स कलेक्टर हैं या गोल्डन ऐज ऑफ़ इंडियन कॉमिक्स (Golden Age of Indian Comics) का स्वाद लेना चाहते हैं, तो यह अंक आपके संग्रह में ज़रूर होना चाहिए। आभार – कॉमिक्स बाइट!!
Credits: Indrajal Comics Group
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