विज्ञान-प्रगति (1991) का विंटेज विज्ञापन: पिंकी, फैंटम और डायमंड कॉमिक्स की सुनहरी यादें। (Vintage Diamond Comics Advertisement from Vigyan Pragati (1991): Pinki, Phantom & Classic Nostalgia.)
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1991 का विंटेज विज्ञापन: पिंकी, डायमंड कॉमिक्स के कई शीर्षक और आइवर यूशियल की पुस्तक रोचक गणित। (A 1991 vintage ad featuring Pinki, Diamond Comics titles and Ivar Utiyal’s book Rochak Ganit.)
भारतीय कॉमिक्स इतिहास में 80 और 90 के दशक को अक्सर स्वर्णिम दौर कहा जाता है। उस समय कॉमिक्स केवल मनोरंजन का माध्यम ही नहीं थीं बल्कि पत्रिकाओं, पुस्तकों और विज्ञापनों के जरिए बच्चों और युवाओं की कल्पनाओं को भी नया आयाम देती थीं। इसी दौर की एक दिलचस्प झलक हमें वर्ष 1991 में प्रकाशित विज्ञान-प्रगति पत्रिका के एक विंटेज विज्ञापन में देखने को मिलती है, जिसमें डायमंड कॉमिक्स की कई लोकप्रिय कॉमिक्स और एक रोचक गणित की पुस्तक के बारे में जानकारी दी गई थी।

Comics Byte
यह विज्ञापन आज केवल एक पुराना विज्ञापन भर नहीं है, बल्कि उस दौर की कॉमिक्स संस्कृति का एक शानदार नॉस्टेल्जिक दस्तावेज़ भी है।
पिंकी और उसका अनोखा संसार
इस विज्ञापन का मुख्य आकर्षण था “नटखट चुलबुली पिंकी”। कार्टूनिस्ट प्राण द्वारा कृत डायमंड कॉमिक्स की यह बेहद लोकप्रिय पात्र अपनी शरारतों और मजेदार घटनाओं के लिए जानी जाती है।
विज्ञापन में जिस कॉमिक को प्रमुखता दी गई थी उसका नाम था:
“पिंकी विश्व रिकार्ड (Pran’s Pinki & The World Record)”
इसमें बताया गया था कि पिंकी का संसार उसके दादाजी और पड़ोसी झपटजी के साथ बेहद अनोखा और हास्य से भरपूर है। यही कारण था कि पिंकी की नई कॉमिक्स पाठकों को खूब गुदगुदाती थीं। उस समय यह कॉमिक्स बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय थीं और उनका विज्ञापन यह दर्शाता है कि पिंकी डायमंड कॉमिक्स की प्रमुख स्टार पात्रों में से एक थी।

जनवरी माह में प्रकाशित अन्य डायमंड कॉमिक्स
इस विज्ञापन में केवल पिंकी ही नहीं, बल्कि उस समय प्रकाशित होने वाली कई अन्य कॉमिक्स की जानकारी भी दी गई थी। इन कॉमिक्स में डायमंड कॉमिक्स के कई लोकप्रिय पात्र शामिल थे।
| कॉमिक्स का नाम | मूल्य (₹) |
|---|---|
| महाबली शाका और खून के व्यापारी | 5.00 |
| मोटू छोटू की समुद्र यात्रा | 5.00 |
| चाचा भतीजा और तिलस्मी कैदखाना | 6.00 |
| पलटू और भुट्टों की चोरी | 5.00 |
| लम्बू मोटू और विमान दुर्घटना | 5.00 |
| फैण्टम-VIII (डाइजेस्ट) | 12.00 |
| छोटू लम्बू-II (डाइजेस्ट) | 12.00 |
इनमें से कई शीर्षक उस दौर में हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी संस्करणों में भी प्रकाशित किए गए थे, जो उस समय के हिसाब से डायमंड कॉमिक्स का एक सराहनीय कदम माना जा सकता है। इससे कॉमिक्स का पाठक वर्ग और भी व्यापक हुआ।
रोचक गणित – विज्ञान और मनोरंजन का संगम
इसी विज्ञापन में एक पुस्तक का प्रचार भी किया गया था जिसका नाम था:
“रोचक गणित”
यह पुस्तक लोकप्रिय बाल-लेखक श्री आइवर यूशियल द्वारा लिखी गई थी। इस पुस्तक की खासियत यह थी कि इसमें गणित को कठिन विषय की तरह नहीं बल्कि मजेदार खेलों और जादू जैसे प्रयोगों के रूप में प्रस्तुत किया गया था। पुस्तक की सामग्री मुख्यतः ‘विज्ञान-प्रगति’ पत्रिका के “गणित मनोरंजन” स्तम्भ में प्रकाशित लेखों पर आधारित थी।

पुस्तक के प्रकाशन से संबंधित विवरण भी विज्ञापन में दिए गए थे:
- पृष्ठ संख्या: 48
- आवरण: आकर्षक बहुरंगी
- मुद्रण: पूरी पुस्तक दो रंगों में मुद्रित
- मूल्य: 8 रुपये
प्रकाशक:
बाल-साहित्य शोध संस्थान, नई दिल्ली
वितरक:
डायमंड कॉमिक्स प्रा. लि.
2715, दरियागंज, नई दिल्ली – 110002
विज्ञापन में यह भी बताया गया था कि लेखक की अन्य पुस्तकें जैसे रोचक सत्य, रोचक जादू और रोचक विज्ञान भी उपलब्ध हैं।
बाल साहित्य में आइवर यूशियल का योगदान
लोकप्रिय बाल-लेखक आइवर यूशियल का योगदान विज्ञान और गणित को बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी पुस्तकों ने जटिल विषयों को सरल और मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि बढ़ी।

दिलचस्प बात यह है कि इतने वर्षों के बाद भी उनकी कई पुस्तकें आज अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जो यह दर्शाता है कि उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
नॉस्टेल्जिया का मेगा डोज़
वर्ष 1991 का यह विज्ञापन केवल कॉमिक्स और पुस्तकों की जानकारी देने तक सीमित नहीं था। यह उस दौर की कॉमिक्स संस्कृति, प्रकाशन शैली और पाठकों की पसंद को भी दर्शाता है।
पिंकी का “विश्व रिकार्ड” वाला विज्ञापन और उसके साथ अन्य कॉमिक्स की सूची यह बताती है कि उस समय डायमंड कॉमिक्स अपने पात्रों और कहानियों को किस तरह लोकप्रिय बना रही थी। साथ ही हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रकाशन का प्रयास उस दौर के लिए एक दूरदर्शी कदम था।

आज जब हम इस विज्ञापन को देखते हैं तो यह केवल एक पुराना विज्ञापन नहीं लगता, यह सच में नॉस्टेल्जिया का एक मेगा डोज़ है, जो हमें भारतीय कॉमिक्स के उस सुनहरे दौर की याद दिलाता है। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
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