नागराज के तीन रूप: आतंकहर्ता, विश्वरक्षक और नरकनाशक नागराज (Nagraj’s Three Forms: Terror Hunter, World Protector and Naraknasak Nagraj)
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आतंकहर्ता से विश्वरक्षक और फिर नरकनाशक तक, जानिए नागराज के अलग-अलग रूपों और उनके रचनात्मक सफर के बारे में। (From Terror Hunter to World Protector and Naraknasak, explore the different forms and creative eras of Nagraj.)
नागराज सिर्फ एक सुपरहीरो नहीं हैं। चार दशकों से अधिक समय में उनकी कहानियों, व्यक्तित्व और रूप में कई बदलाव आए हैं। अलग-अलग दौर में अलग-अलग रचनाकारों और कलाकारों ने नागराज को अपनी कल्पना और कला से एक नया आयाम दिया। यही वजह है कि पुराने पाठकों के लिए नागराज की यादें एक जैसी नहीं हैं किसी के लिए वह पुराने राज कॉमिक्स वाला नागराज हैं, किसी के लिए महानगर के बाद का विश्वरक्षक और किसी के लिए नरकनाशक नागराज।
“नागराज जन्मोत्सव वीक” (Nagraj Week) के दौरान आज हम इसी बदलाव को थोड़ा करीब से समझते हैं।

Art by Pratap Mullick & Chandu Artist
नागराज के शुरुआती दौर को याद करें तो राज कॉमिक्स के प्रकाशन काल में संजय अष्टपुत्रे जी और प्रताप मुलिक जी जैसे रचनाकारों और कलाकारों ने इस चरित्र को पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संजय जी, राजा और अन्य लेखकों की कहानियों और प्रताप मुलिक जी की विशिष्ट कला ने नागराज की शुरुआती दुनिया को एक अलग पहचान दी जिसे आज लोग ‘क्लासिक नागराज’ के नाम से। उसी दौर में चंदू जी, मिलिंद मिसाल और विठ्ठल कांबले जैसे कई कलाकारों ने भी नागराज को अपनी कला और इंक से संवारा।

समय के साथ नागराज की दुनिया भी बदली। कहानी का दायरा बढ़ा और चरित्र को एक नए रूप में प्रस्तुत किया गया। इसी परिवर्तन के दौर में ‘विश्वरक्षक नागराज’ सामने आया जब उसने अपना कार्यक्षेत्र ‘महानगर’ को बना लिया। अनुपम सिन्हा जी ने नागराज की कहानियों और उनके दृश्य संसार को एक ऐसी पहचान दी, जिसे भारतीय कॉमिक्स के पाठक आज भी बेहद खास मानते हैं। इस दौर में नागराज सिर्फ अपने पारंपरिक अंदाज में अपराध और आतंक से लड़ने वाला नायक नहीं रहा, बल्कि उनकी कहानियों का विस्तार और उनका चरित्र दोनों बड़े स्तर पर विकसित हुए और नए चरित्रों का आगमन हुआ जैसे भारती, नागू, शीतनाग और वेदाचार्य।

इसके बाद नागराज के सफर में एक और महत्वपूर्ण दौर आया, जब ‘आतंकहर्ता नागराज’ के रूप को सामने रखा गया। आतंकवाद और उसके खिलाफ संघर्ष पर केंद्रित कहानियों में नागराज का व्यक्तित्व एक अलग तेवर के साथ दिखाई देता है। इस दौर में ललित शर्मा जी सहित अन्य रचनाकारों और कलाकारों का योगदान भी देखने को मिलता है। नागराज की 200 वीं काॅमिक्स ‘क्षतिपूर्ति’ भी इसी श्रृंखला के माध्यम से प्रकाशित हुई थी।

Art by Hemant Kumar
बीच में एक दूसरी समयधारा में नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की मैगनम ओपस काॅमिक्स “नागायण” भी देखने को मिली और फिर आया नागराज का एक और अलग रूप नरकनाशक नागराज।
नरकनाशक नागराज की कहानियों ने चरित्र को एक अलग ही दिशा में आगे बढ़ाया। नितिन मिश्रा जी द्वारा लिखी गई और हेमंत जी द्वारा संवारी गई इस श्रृंखला में नागराज का स्वरूप और उसकी दुनिया पहले के रूपों से अलग दिखाई देती है, एक नया ओरिजिन, कुछ नए पात्र पर वही अधूरा प्रेम। यहाँ कहानी का विस्तार केवल सामान्य अपराध या आतंक की सीमाओं तक नहीं रहता, बल्कि नागराज के अस्तित्व और उसकी अलग-अलग पहचानों से जुड़े सवाल भी कहानी का हिस्सा बनते हैं।

Art by Abhishek Malsuni
इस तरह अगर नागराज के इन प्रमुख रूपों को सरल तरीके से समझें, तो हमारे सामने तीन महत्वपूर्ण पहचान आती हैं “आतंकहर्ता नागराज, विश्वरक्षक नागराज और नरकनाशक नागराज।”
इन तीनों के रास्ते और उनकी कहानियों का वातावरण अलग-अलग दिखाई देता है। उनके सामने आने वाली चुनौतियाँ भी अलग हैं और उन्हें प्रस्तुत करने वाले रचनाकार भी अलग रहे हैं। लेकिन नागराज की सबसे दिलचस्प बात यही है कि ये अलग-अलग रूप केवल अलग-अलग कहानियों तक सीमित नहीं रहते।

Art by Hemant Kumar
नरकनाशक श्रृंखला में अतीत के इन अलग-अलग रूपों और नागराज की पहचान के बीच संबंध को समझाने वाला एक महत्वपूर्ण संदर्भ भी सामने आता है। यानी जिन नागराजों को पाठक अलग-अलग दौर के नायक के रूप में देखते आए हैं, उनके बीच कहानी एक ऐसा संबंध स्थापित करने की कोशिश करती है जो इस पूरे सफर को एक बड़े संदर्भ में देखने का अवसर देता है। अनेक काल, विपरीत पथ पर एक ‘नियति’।
यही नागराज की शायद सबसे खूबसूरत बात है जहां एक तरफ हमारे पास वह नागराज है जिसे पुराने पाठकों ने राज कॉमिक्स के शुरुआती दौर में देखा। फिर वही चरित्र समय के साथ बदलता है, नए रचनाकारों के हाथों नई कहानियाँ और नया रूप पाता है और आगे चलकर नरकनाशक जैसे अलग अवतार के रूप में एक नई दिशा में प्रवेश करता है।
कलाकार बदलते रहे, कहानी कहने का अंदाज बदलता रहा और नागराज का रूप भी बदलता रहा लेकिन नागराज की पहचान कहीं न कहीं इन सभी दौरों को जोड़ती रही।”
शायद यही वजह है कि नागराज को पढ़ना सिर्फ एक सुपरहीरो की कहानी पढ़ना नहीं है। यह भारतीय कॉमिक्स के बदलते दौर को देखने जैसा भी है।

इस नागराज वीक में हम इसी सफर की कुछ और परतों को सामने लाने की कोशिश करेंगे। क्योंकि नागराज की कहानी सिर्फ उनके जन्मदिन तक सीमित नहीं है औल उसकी दुनिया में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जिसे पुराने पाठक याद करना चाहते हैं और नई पीढ़ी के पाठक जानना चाहते हैं। आभार – काॅमिक्स बाइट!!




