कारगिल विजय दिवस स्पेशल: जब राज कॉमिक्स का ‘तिरंगा’ पहुँचा था कारगिल की चोटियों पर! (Kargil Vijay Diwas Special | Raj Comics Tiranga Kargil Comics Overview)
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कारगिल विजय दिवस पर याद करते हैं राज कॉमिक्स के उस ऐतिहासिक विशेषांक को, जिसने भारतीय सेना के अदम्य साहस को सुपरहीरो तिरंगा की कहानी के साथ पाठकों तक पहुँचाया।
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।”
26 जुलाई… एक ऐसी तारीख़ जिसे भारत कभी भूल नहीं सकता।
कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का उत्सव नहीं, बल्कि उन वीर सैनिकों को नमन करने का दिन है जिन्होंने दुर्गम पहाड़ों पर अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर तिरंगे की शान कायम रखी।

उस दौर में देशभक्ति केवल समाचार चैनलों या अख़बारों तक सीमित नहीं थी। भारतीय कॉमिक्स ने भी अपने-अपने तरीके से उस भावना को पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की। इन्हीं प्रयासों में राज कॉमिक्स का ‘करगिल’ (तिरंगा का विशेषांक) एक ऐसा प्रकाशन बनकर सामने आया, जो आज भी कलेक्टर्स और 90s के पाठकों की यादों में अपनी अलग जगह रखता है।
भारतीय कॉमिक्स में देशभक्ति पर आधारित कहानियाँ बहुत कम प्रकाशित हुई हैं। राज कॉमिक्स का “करगिल” विशेषांक उन दुर्लभ प्रकाशनों में से एक है, जिसने वास्तविक ऐतिहासिक घटना को सुपरहीरो कथा के साथ जोड़ने का साहसिक प्रयास किया।“
कॉमिक्स एक नज़र में
कॉमिक: करगिल (विशेषांक)
मुख्य नायक: तिरंगा
प्रकाशक: राज कॉमिक्स
लेखक: हनीफ अजहर
विशेष सहयोग: अनुपम सिन्हा
चित्रकार: दिलीप चौबे
कवर आर्ट: स्वर्गीय धीरज वर्मा
स्पेशल इफेक्ट्स: मालती वर्मा
पृष्ठ: 64

धीरज वर्मा का बनाया आवरण जो आज भी नज़रें रोक देता है
भारतीय कॉमिक्स में कुछ आवरण ऐसे हैं जिन्हें देखते ही पूरी कहानी याद आ जाती है। ‘करगिल’ का कवर भी उन्हीं में से एक है। आवरण के बैकग्राउंड में लहराता भारतीय तिरंगा आपको नायक के अपने भूमि से जुड़े राष्ट्रहित और देशभक्ति को दर्शाने में सफल होता है।
स्वर्गीय धीरज वर्मा ने तिरंगा को जिस ऊर्जा, आत्मविश्वास और युद्धभावना के साथ चित्रित किया, वह उस समय पूरे देश के जज़्बे का प्रतीक बन गया। यह केवल एक आकर्षक चित्र नहीं था, बल्कि उस दौर की राष्ट्रीय भावना का दृश्य रूप था।
आज भी कई संग्राहकों के लिए यह विशेषांक अपने प्रतिष्ठित आवरण की वजह से संग्रह का अहम हिस्सा है। मालती वर्मा जी के स्पेशल इफेक्ट्स इसे एक मौलिक अनुभव प्रदान करते हैं जहां दोनों देशों के फौजी भी नजर आते हैं।
जब सुपरहीरो ने सैनिकों को नहीं, सैनिकों ने सुपरहीरो को बड़ा बनाया
‘करगिल’ काॅमिक्स की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी यही बात है।
कहानी में तिरंगा ज़रूर है, लेकिन पूरी कॉमिक कहीं भी भारतीय सेना के योगदान को पीछे नहीं करती। हनीफ अजहर ने वास्तविक घटनाओं से प्रेरित वातावरण में एक ऐसा सुपरहीरो एडवेंचर रचा, जहाँ असली नायक हमारे सैनिक ही बने रहते हैं।
अनुपम सिन्हा के रचनात्मक सहयोग ने कहानी को और प्रभावशाली बनाया। परिणामस्वरूप यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उस समय की राष्ट्रीय भावना का भी प्रतिनिधित्व करती है। काॅमिक्स से प्राप्त सारी आय भी आर्मी सेंट्रल वैलफेयर फंड्स को डोनेट की गई थी।
दिलीप चौबे की कला और मालती वर्मा के स्पेशल इफेक्ट्स
युद्ध के दृश्य बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब हर पैनल में तनाव और गति दोनों बनाए रखने हों।
दिलीप चौबे ने बर्फ़ीली चोटियों, सैनिकों की टुकड़ियों, दुश्मन के बंकरों और एक्शन दृश्यों को बेहद प्रभावशाली ढंग से उकेरा है। वहीं मालती वर्मा के स्पेशल इफेक्ट्स ने विस्फोटों और युद्ध के माहौल को और जीवंत बना दिया।
आज भी क्यों खास है यह विशेषांक?
- कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित राज कॉमिक्स का दुर्लभ प्रकाशन।
- तिरंगा के सबसे यादगार विशेषांकों में शामिल।
- स्वर्गीय धीरज वर्मा के शानदार कवर आर्ट के लिए प्रसिद्ध।
- देशभक्ति और सुपरहीरो फिक्शन का संतुलित संगम।
- हर राज कॉमिक्स संग्राहक के संग्रह में जगह पाने योग्य अंक।
कॉमिक्स केवल काल्पनिक दुनिया नहीं रचतीं, वे अपने समय की भावनाओं को भी सहेजकर रखती हैं।
राज कॉमिक्स का ‘करगिल’ विशेषांक इसी बात का प्रमाण है की वर्षों बाद जब हम इसके पन्ने पलटते हैं, तो केवल तिरंगा का रोमांच नहीं मिलता, बल्कि उस दौर का देशप्रेम, कलाकारों की मेहनत और भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान भी महसूस होता है।
कारगिल विजय दिवस पर काॅमिक्स बाइट (Comics Byte) उन सभी वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करता है जिनकी बदौलत आज हम सुरक्षित हैं। लगभग पाँच सौ से भी ज्यादा रणबांकुरों ने इस माटी को अपने लहू से सींच दिया ताकि आप और हम सुरक्षित रह सकें। सनद रहे, सेना किसी भी रूप (आर्मी, नेवी और एयरफोर्स) में सम्मानीय हैं, इसे सर्वोत्तम आदर और सत्कार के साथ प्रणाम करें। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
जय हिन्द!




