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काॅमिक्स बाइट रिव्यू: जाल – महाबली भोकाल – राज कॉमिक्स (Jaal Review: Mahabali Bhokal – A Classic Raj Comics Tale of Exile, Conspiracy and Nostalgia)

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राज कॉमिक्स की दुनिया में महाबली भोकाल की एक ऐसी कहानी, जहाँ पौराणिक कथाओं की छाप, रिश्तों की परीक्षा, अज्ञातवास का रोमांच और कदम स्टूडियोज़ का शानदार चित्रांकन एक साथ दिखाई देता है। (Jaal brings together Mahabali Bhokal’s mythological roots, an intriguing conspiracy, the drama of exile and the unforgettable artwork of Kadam Studios, while taking readers straight back to the golden era of Raj Comics.)

राज कॉमिक्स के पुराने अंकों को दोबारा पढ़ने का अपना अलग आनंद है।

कई बार कहानी याद नहीं रहती, संवाद याद नहीं रहते और घटनाओं का क्रम भी धुंधला पड़ जाता है। लेकिन जैसे ही पुराना कवर सामने आता है, अंदर के पन्ने पलटते हैं और पुराने विज्ञापन दिखाई देते हैं, अचानक पूरा एक दौर आंखों के सामने लौट आता है।

“जाल” — महाबली भोकाल, संख्या #178 कुछ ऐसा ही अनुभव है।

Jaal - Bhokal Series - Raj Comics
Jaal – Bhokal Series – Raj Comics
Doga Year

यह सिर्फ एक भोकाल कॉमिक्स नहीं है। यह राज कॉमिक्स के उस दौर का प्रतिनिधित्व करती है जब एक कॉमिक्स के अंदर मुख्य कहानी के साथ-साथ आने वाली कॉमिक्स की घोषणाएँ, दूसरे किरदारों की झलकियाँ, विज्ञापन और पूरे राज कॉमिक्स संसार की हलचल भी मौजूद रहती थी।

और शायद यही वजह है कि आज इतने वर्षों बाद भी “जाल” जैसी कॉमिक्स को पढ़ना केवल कहानी पढ़ना नहीं लगता। यह अतीत में लौटने जैसा लगता है।

“जाल” आखिर किस तरह की कहानी है?

ऊपरी तौर पर देखें तो “जाल” एक सीधी-सी भोकाल कथा लग सकती है, एक राक्षस का आतंक, कुछ संघर्ष, राजदरबार में पैदा हुआ विवाद, भोकाल के खिलाफ बढ़ता अविश्वास, अज्ञातवास, एक रहस्यमय षड्यंत्र और अंत में एक बड़ी चुनौती।

लेकिन कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, स्पष्ट होता है कि असली लड़ाई किसी एक राक्षस से नहीं है।

Bhokal Series - Doga Year - Raj Comics
Bhokal Series – Doga Year – Raj Comics

असली लड़ाई है भोकाल को उसके अपने लोगों से दूर करने की।

किसी बाहरी दुश्मन को हराना भोकाल के लिए मुश्किल नहीं है।

लेकिन जब उसके अपने ही लोग उस पर संदेह करने लगें, उसके रिश्ते टूटने लगें और उसके ऊपर ऐसे अपराधों का आरोप लग जाए जो उसने किए ही नहीं, तब उसकी असली परीक्षा शुरू होती है।

यहीं से “जाल” अपने नाम को सार्थक करती है।

भोकाल धीरे-धीरे एक ऐसे षड्यंत्र में फंसता चला जाता है, जिसकी डोर उसके सबसे बड़े दुश्मन काल कुंडली के हाथ में है।

डोगा ईयर में प्रकाशित एक से बढ़कर एक कहानीयों में ‘जाल’ भी जरूर शामिल की जाएगी जो एक वन-शाॅट स्टोरीटेलिंग में खरी उतरती हैं।

कहानी (Story)

कहानी चरणबद्ध तरीके से चलती है और उसकी शुरुआत विकास नगर से होती है। यहाँ सप्तशीश नाम का एक राक्षस उत्पात मचाने पहुंचता है। सेनापति प्रवीण सिंह उसे रोकने और समाप्त करने की कोशिश करते हैं। वे अपने सप्त संधान बाणों से सप्तशीश पर प्रहार करते हैं।

लेकिन निर्णायक क्षण में भोकाल पीछे से आकर प्रहारा की सहायता से सप्तशीश का अंत कर देता है। सामान्य परिस्थितियों में यह एक नायक द्वारा दूसरे नायक की सहायता जैसा लगता।

Jaal - Bhokal Series - Raj Comics 
Mahabali Bhokal aur Senapati Praveen Singh
Mahabali Bhokal aur Senapati Praveen Singh
Jaal – Bhokal Series – Raj Comics

लेकिन यहाँ समस्या पैदा हो जाती है।

प्रवीण सिंह को यह बात बेहद खटकती है कि जब वह स्वयं सप्तशीष को समाप्त करने वाला था, तब भोकाल ने बीच में हस्तक्षेप क्यों किया।

यह घटना आगे आने वाले तनाव की पहली कड़ी बन जाती है। इसके बाद भोकाल और प्रवीण सिंह महारानी के राजमहल पहुंचते हैं। वहीं भोकाल एक महत्वपूर्ण बात बताता है की उसने ‘काला महल’ का नाम बदलकर “तुरीन महल” कर दिया है।

यह सिर्फ नाम बदलने की घटना नहीं है।

इसके पीछे भोकाल के जीवन और उसकी दिवंगत पत्नी तुरीन से जुड़ी भावनात्मक कहानी है। इस प्रसंग को पूरी तरह समझने के लिए पाठकों को भोकाल की पिछली कहानी “मृत्यु संकेत” की ओर जाना पड़ेगा।

महारानी भोकाल से क्षमा मांगने को कहती हैं और यह बात भोकाल की पत्नी रूपसी और सलोनी को भी पसंद नहीं आती।

लेकिन जब भोकाल तुरीन महल में अपनी मृत पत्नी तुरीन को याद करता है, तब कहानी अचानक एक अलग भावनात्मक रंग ले लेती है।

महाबली होने के बावजूद भोकाल कितना मानवीय है

भोकाल की कहानियों की एक खूबसूरत विशेषता यही रही है कि उसकी असाधारण शक्तियों के पीछे एक बेहद मानवीय चरित्र भी दिखाई देता है।वह दूसरे लोक से आया हुआ महाबली है। उसके पास ऐसी शक्तियाँ हैं जिनके सामने सामान्य मनुष्य टिक भी नहीं सकता।

लेकिन तुरीन की याद में उसका दुख, उसके रिश्तों का महत्व और अपने लोगों से मिलने वाली चोट उसे पूरी तरह मानवीय बना देती है।

Bhokal and Tureen - A Panel From Jaal Comics
Bhokal and Tureen – A Panel From Jaal Comics by Kadam Studios

तुरीन के प्रति भोकाल का प्रेम इस कहानी के सबसे भावुक पक्षों में से एक है। यहाँ भोकाल केवल एक योद्धा नहीं है, वह एक पति है, एक मित्र है और सबसे बढ़कर, वह ऐसा व्यक्ति है जो अपने प्रियजनों को खोने का दर्द समझता है।

यही भावनात्मक गहराई भोकाल के चरित्र को केवल शक्ति प्रदर्शन से कहीं ऊपर ले जाती है।

भोकाल और प्रवीण सिंह के बीच बढ़ता तनाव

इस बीच अखंडनाद की आवाज भोकाल तक पहुंचती है। कुछ सैनिक उसे सेनापति प्रवीण सिंह के अत्याचारों के बारे में बताते हैं। स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है और भोकाल तथा प्रवीण सिंह के बीच झड़प होती है।

महारानी मोहिनी समय रहते वहां पहुंचती हैं और दोनों को रोक देती हैं एवं दोनों को आपस में लड़ाई न करने का आदेश देती हैं। लेकिन तब तक कहानी यह साफ कर चुकी होती है कि भोकाल और प्रवीण सिंह के बीच अविश्वास की दीवार खड़ी हो चुकी है।

राजकुमार अंकित मोहन की वापसी

कहानी में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है राजकुमार अंकित मोहन की वापसी। अंकित मोहन गुरु योगेश्वर के आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने के बाद एक वर्ष के पश्चात वापस लौट रहा है।

भोकाल उसके आने की खबर से बेहद खुश होता है। आखिर अंकित उसे प्यार से “भोकाल चाचा” कहकर बुलाता था। लेकिन अंकित के वापस लौटने से पहले ही परिस्थितियाँ बदल जाती हैं।

उसका सामना महाबाहु नाम के राक्षस से होता है और दोनों के बीच जबरदस्त संघर्ष होता है। बाद में भोकाल वहां पहुंचता है और महाबाहु का अंत कर देता है। लेकिन एक बार फिर भोकाल का उद्देश्य गलत समझ लिया जाता है।

अंकित मोहन भोकाल से नाराज हो जाता है और उससे अपने रिश्ते तोड़कर आगे बढ़ जाता है। भोकाल को अब समझ ही नहीं आता कि आखिर उसके आसपास यह सब क्यों हो रहा है।

उसके अपने लोग उससे दूर क्यों होते जा रहे हैं?

और हर घटना किसी न किसी तरह उसके खिलाफफ क्यों जा रही है?

और यही वह वातावरण है जिसको अपने योगमाया से बनाने वाला स्वयं काल कुंडली है।

जब महाबली भोकाल पर चोरी का आरोप लगा

कहानी का अगला मोड़ शायद पूरे अंक का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।

अगले दिन विकास नगर के लोग एक ऐसा दृश्य देखते हैं जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। भोकाल लोगों के रुपये, पैसे और गहने चोरी करता दिखाई देता है।

लोग उसे पकड़ लेते हैं और मामला राजदरबार तक पहुंचता है एवं देखते ही देखते महाबली भोकाल एक अपराधी के रूप में राजदरबार में खड़ा है उसे 40 दिनों के अज्ञातवास का दंड दिया जाता है लेकिन इसके साथ एक और नियम है:

अगर अज्ञातवास के दौरान कोई व्यक्ति भोकाल को पहचान लेता है, तो उसका अज्ञातवास दोगुना हो जाएगा।

यहीं से कहानी का शीर्षक “जाल” पूरी तरह समझ में आने लगता है क्योंकि भोकाल चारों ओर से परिस्थितियों के जाल में फंस चुका है।

Jaal - Bhokal Series - Raj Comics
Jaal – Bhokal Series – Raj Comics

महाभारत के अज्ञातवास की याद

भोकाल की कहानियों में भारतीय पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों का प्रभाव पहले से दिखाई देता रहा है। “जाल” में यह प्रभाव विशेष रूप से स्पष्ट हो जाता है – अज्ञातवास।

महाभारत में पांडवों ने अपने वनवास के अंतिम चरण में अज्ञातवास किया था। उन्हें अपनी पहचान छिपाकर दूसरे राज्य में रहना पड़ा था।

“जाल” में भी महाबली भोकाल को ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ता है। वह अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर दूसरे राज्य की ओर जाता है।

लेकिन यह अज्ञातवास केवल छिपने की कहानी नहीं बनता।

भोकाल वहां भी अपने स्वभाव के अनुरूप अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है और घटनाओं के बीच अपनी भूमिका निभाता है। यह भारतीय महाकाव्य से प्रेरणा लेकर उसे भोकाल के काल्पनिक संसार में ढालने का एक अच्छा उदाहरण है।

अज्ञातवास के दौरान भोकाल तुरीन महल में रुकता है। यहीं उसकी मुलाकात तुरीन की आत्मा से होती है। तुरीन भोकाल को बताती है कि उसने जो किया, वह सही था। इसके बाद कहानी का सबसे महत्वपूर्ण रहस्य सामने आता है।

इन सारी घटनाओं के पीछे था – ‘काल कुंडली।’

भोकाल का पुराना खलनायक उसके भाग्य में पाप योग लिखकर ऐसा षड्यंत्र रच रहा था जिसमें भोकाल को उसके अपने ही लोगों के हाथों कष्ट मिले। यानी भोकाल को हराने की योजना उसकी शक्ति से मुकाबला करने की नहीं थ बल्कि योजना थी उसे उसके अपनों से हराने की।

और यही “जाल” की सबसे मजबूत अवधारणा है।

उदयगिरी और गजमुखता मोती

काल कुंडली के इस षड्यंत्र को पलटने के लिए भोकाल को अब उदयगिरी राज्य जाना है। वहां उसे प्राप्त करनी है एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तु – गजमुक्ता मोती।

यह मोती विशाल हाथी गजेंद्र के मस्तक पर विराजमान है। यही वह मोती है जिसके माध्यम से काल कुंडली द्वारा बनाए गए पाप योग को पलटने की संभावना पैदा होती है। भोकाल वेश बदलकर उदयगिरी की ओर निकल पड़ता है।

लेकिन सेनापति प्रवीण सिंह के गुप्तचर भी उसका पीछा करते हुए वहां तक पहुंच जाते हैं। अब भोकाल को अपनी पहचान छिपाते हुए इस पूरे षड्यंत्र का सामना करना है और कहानी यहीं अपने सबसे बड़े एक्शन की ओर बढ़ती है।

भोकाल बनाम गजेंद्र

“जाल” का कवर इस कॉमिक्स की सबसे आकर्षक चीजों में से एक है।

कदम स्टूडियोज़ ने महाबली भोकाल को एक विशाल हाथी के सामने दिखाया है, जहाँ भोकाल अपने दोनों हाथों से उसके पैरों को रोकता हुआ दिखाई देता है।

यह दृश्य केवल आकर्षक नहीं है। यह भोकाल की पूरी शख्सियत को एक ही तस्वीर में बयान करता है। एक तरफ विशालकाय गजेंद्र, दूसरी तरफ महाबली भोकाल और बीच में शक्ति की वह टक्कर, जिसकी कल्पना ही रोमांच पैदा करती है।

सबसे अच्छी बात यह है कि आवरण केवल दिखावे के लिए नहीं है।

Bhokal vs. Gajendra - Panels From Jaal Comics
Bhokal vs. Gajendra – Panels From Jaal Comics

गजेंद्र और भोकाल का संघर्ष कहानी के भीतर भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यानी कवर आपको जिस रोमांच का वादा करता है, कॉमिक्स उसे पूरा करती है।

कदम स्टूडियोज़ का चित्रांकन: इस कॉमिक्स की बड़ी ताकत

“जाल” की कहानी को संजय गुप्ता जी का लेखन गति देता है, लेकिन उसके दृश्य प्रभाव को यादगार बनाने में कदम स्टूडियोज़ का योगदान बहुत बड़ा है।

विशेष रूप से:

  • भोकाल के चेहरे के भाव
  • युद्ध के दृश्य
  • राक्षसों का चित्रण
  • विशाल प्राणियों का आकार
  • पात्रों की शारीरिक भाषा
  • एक्शन की प्रस्तुति

इन सभी में एक खास तरह की ऊर्जा दिखाई देती है।

दिलीप कदम और कदम स्टूडियोज़ का आर्टवर्क आज भी क्लासिक महसूस होता है।

Jaal - Bhokal Series - Raj Comics
Jaal – Bhokal Series – Raj Comics
Art By Kadam Studios

चेहरे के भाव में भावनाएँ स्पष्ट हैं और पैनल्स में वह भव्यता है जिसकी उम्मीद एक महाबली के एडवेंचर से की जाती है। आज के डिजिटल युग में हम तकनीकी रूप से कहीं अधिक चमकदार आर्ट देख सकते हैं, लेकिन पुराने राज कॉमिक्स में जो हाथ से बनाया गया कैरेक्टर प्रेजेंस और विजुअल पर्सनैलिटी थी, उसका अपना अलग आकर्षण है।

“जाल” उस आकर्षण का अच्छा उदाहरण है।

रचनात्मक टीम

इस कॉमिक्स को आकार देने वाली टीम में प्रमुख नाम हैं:

कहानी: संजय गुप्ता

संजय गुप्ता की कहानी बहुत जटिल नहीं है, लेकिन इसकी गति अच्छी है। घटनाएँ लगातार आगे बढ़ती हैं और पाठक को अगले मोड़ तक ले जाती हैं।

संपादन: मनीष गुप्ता

संपादन कहानी और उसके विभिन्न हिस्सों को एक कसावट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चित्रांकन: कदम स्टूडियोज़

यही वह हिस्सा है जो “जाल” को एक विजुअल ट्रीट बनाता है।

कॉमिक्स विवरण (Details)

कॉमिक्स: जाल
मुख्य पात्र: महाबली भोकाल
राज कॉमिक्स अंक संख्या: 178
मूल्य: ₹18
कहानी: संजय गुप्ता
संपादन: मनीष गुप्ता
चित्रांकन: कदम स्टूडियोज़
प्रकाशन काल: लगभग 2000 के दौर का राज कॉमिक्स कालखंड
शैली: फैंटेसी, पौराणिक प्रेरणा, सुपरहीरो, रोमांच और एक्शन

₹18 की कीमत आज देखकर शायद विश्वास करना मुश्किल हो कि कभी एक पूरी राज कॉमिक्स इतने कम मूल्य में मिल जाती थी लेकिन यही कीमत इस कॉमिक्स को पढ़ते समय नाॅस्टैलजिया को और बढ़ा देती है।

असली बोनस: कॉमिक्स के अंदर छिपा 2000 का राज कॉमिक्स संसार

“जाल” को दोबारा पढ़ते समय कहानी के अलावा जो चीज सबसे ज्यादा आकर्षित करती है, वह है इसके अंदर मौजूद अतिरिक्त सामग्री और विज्ञापन। यह वह समय था जब राज कॉमिक्स का हर अंक अपने साथ भविष्य की कई कहानियों की झलक लेकर आता था।

कमांडो फोर्स

सुपर कमांडो ध्रुव की “कमांडो फोर्स” से जुड़ी जानकारी इस अंक में मिलती है। आज किसी पुराने अंक में ऐसी घोषणा देखना अपने आप में एक छोटा-सा इतिहास पढ़ने जैसा लगता है।

भागो पगल आया

आगामी सेट में “भागो पगल आया” की जानकारी भी दिखाई देती है। यह भेड़िया और कोबी से जुड़ी टू-इन-वन कहानी थी। इसकी कीमत ₹25 और लंबाई 96 पृष्ठ बताई गई थी।

कोहराम: जब पूरा राज कॉमिक्स यूनिवर्स एक साथ दिखाई पड़ा

शायद इस अंक का सबसे बड़ा मोमेंट है “कोहराम” का विज्ञापन। वर्ष 2000 में आने वाली 120 पृष्ठों की इस महागाथा के विज्ञापन में एक साथ कई बड़े किरदार दिखाई देते हैं:

नागराज।
शक्ति।
परमाणु।
तिरंगा।

आज इस विज्ञापन को देखना केवल किसी पुरानी कॉमिक्स का प्रचार देखना नहीं है। यह उस समय के राज कॉमिक्स यूनिवर्स की महत्वाकांक्षा की झलक है। एक ऐसा समय जब पाठक इन सभी किरदारों को एक ही बड़े संसार का हिस्सा महसूस करता था।

डोगा ने मारा और गमराज की झलक

इसके साथ “डोगा ने मारा” का विज्ञापन भी मिलता है, जिसमें डोगा और गमराज दिखाई देते हैं। आज के पाठक के लिए ये विज्ञापन शायद अतिरिक्त सामग्री हों लेकिन पुराने राज कॉमिक्स पाठकों के लिए ये सभी स्वयं आगामी अंको की जानकारी का हिस्सा थीं।

Raj Comics Vintage Ad - Ja Lalkaar Maut Ko - Bhokal Series
Raj Comics Vintage Ad – Ja Lalkaar Maut Ko – Bhokal Series

कई बार किसी पुराने अंक को खोलते ही कहानी से पहले कोई विज्ञापन को देखकर ही पूरा बचपन याद आ जाता है और “जाल” काॅमिक्स में यही अनुभव बार-बार होता है।

“जाल” की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

अगर केवल कहानी को देखा जाए तो “जाल” कोई बेहद जटिल या दार्शनिक कथा नहीं है। लेकिन इसकी ताकत इसकी प्रस्तुति में है जहां एक घटना दूसरी घटना को जन्म देती है। भोकाल और प्रवीण सिंह का तनाव बढ़ता है, अंकित मोहन और महारानी के साथ उसका रिश्ता प्रभावित होता है।

भोकाल पर अपराध का आरोप लगता है एवं उसे अज्ञातवास मिलता है, तुरीन की आत्मा रहस्य बताती है और काल कुंडली का षड्यंत्र सामने आता है। उसके बाद उदयगिरी नगर की यात्रा शुरू होती है और गजमुक्ता मोती की तलाश होती है।

और अंततः भोकाल उस जाल को तोड़ने की कोशिश करता है जिसमें उसे फंसाया गया था। इस वजह से कहानी में लगातार गति बनी रहती है।

अगर आप पहली बार इसे आज पढ़ रहे हैं, तो इसकी कहानी आपको कुछ जगह सरल लग सकती है। लेकिन अगर आप इसे उसके समय और संदर्भ के साथ पढ़ेंगे, तो इसका आनंद कहीं ज्यादा बढ़ जाता है।

यह 2000 के दौर की राज कॉमिक्स है।

यह वह दौर है जब कहानी के साथ पात्रों का संसार, विज्ञापन और आगामी रिलीज़ भी पाठक के अनुभव का हिस्सा थे और यही कारण है कि “जाल” आज एक पुरानी कॉमिक्स होने के बावजूद अपनी अलग पहचान बनाए रखती है।

काॅमिक्स बाइट रेटिंग

⭐ 4.5/5

अगर 10 में अंक देने हों तो मैं 8.5 से 9/10 के बीच इसे रखूंगा।

कहानी: 4.5/5
चित्रांकन: 5/5
एक्शन: 4.5/5
भावनात्मक पक्ष: 4.5/5
नॉस्टेल्जिया: 5/5

“जाल” में वह सब कुछ है जिसकी उम्मीद एक क्लासिक महाबली भोकाल कि कहानी से की जा सकती है।

शानदार आर्ट, तेज घटनाक्रम, पौराणिक संदर्भ, भावनात्मक रिश्ते, बड़ा षड्यंत्र और दमदार एक्शन।

निष्कर्ष (Conclusion)

“जाल” को अगर केवल एक सुपरहीरो काॅमिक्स के रूप में पढ़ेंगे, तो आपको एक अच्छा कथानक मिलेगा। लेकिन अगर इसे राज कॉमिक्स के इतिहास और 2000 के दौर की यादों के साथ पढ़ेंगे, तो इसका अनुभव कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है।

यह कहानी बताती है कि सबसे शक्तिशाली व्यक्ति को भी उसके अपने रिश्तों के जरिए कमजोर किया जा सकता है। यह भोकाल की ताकत दिखाती है, लेकिन उससे ज्यादा उसकी इंसानियत दिखाती है।

तुरीन के प्रति उसका प्रेम, अंकित मोहन के साथ उसका रिश्ता, प्रवीण सिंह के साथ उसका संघर्ष और काल कुंडली का षड्यंत्र! ये सभी मिलकर भोकाल को सिर्फ एक महाबली नहीं रहने देते। वह एक ऐसा चरित्र बन जाता है जिसके साथ पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ सकता है।

Alop aka Bhokal - Raj Comics Issue #178: Jaal
Alop aka Bhokal – Raj Comics Issue #178: Jaal

और फिर आता है कदम स्टूडियोज़ का शानदार चित्रांकन, जो पूरी कहानी को वह अद्भुत ट्रीटमेंट प्रदान करता है जिसकी इस तरह की पौराणिक फैंटेसी को जरूरत होती है।

लेकिन मेरे लिए “जाल” की सबसे खूबसूरत चीज शायद इसकी कहानी से भी आगे है। वह है इसके पन्नों में छिपा 2000 का राज कॉमिक्स संसार, ₹18 की कॉमिक्स, पुराने विज्ञापन और आने वाली कहानियों की घोषणाएँ।

नागराज, शक्ति, परमाणु, तिरंगा, अल्फा-मैन, डोगा, गमराज, ध्रुव और भोकाल से भरी वह दुनिया। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो समझ आता है कि हम केवल कॉमिक्स नहीं खरीदते थे।

हम यादें खरीदते थे और “जाल” उन यादों में से एक बेहद खूबसूरत याद है।

आपने “जाल” पढ़ी है?

क्या आपको भी इस कॉमिक्स का आर्टवर्क, भोकाल का अज्ञातवास और अंदर छपे पुराने विज्ञापन याद हैं?

अपनी यादें और इस कॉमिक्स से जुड़ा अनुभव हमें कमेंट में जरूर बताइए। आभार – काॅमिक्स बाइट!!

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