राज कॉमिक्स के थीम पर आधारित रेस्तरां (Raj Comics Themed Restaurant)

हिंदी कॉमिक्स को लेकर भारत में उदासीनता कोई नई बात नहीं हैं, बचपन में यानि 80-90 के दशक के दौरान

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भारतीय हिंदी कॉमिक्स की दोयम दर्जे की गुणवत्ता का जिम्मेदार कौन! (Quality Issues In Hindi Indian Comics)

काॅमिक्स के दोयम दर्जे की गुणवत्ता के पीछे क्या कारण है? क्यों इतने वर्षों बाद भी इसमें सुधार नहीं लाया

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कॉमिक्स का उचित मूल्य क्या होना चाहिए? (What should be the fair price of comics?)

नमस्कार मित्रों, कॉमिक्स जगत का परिदृश्य लगातार बदलता रहता है. कभी कोई कॉमिक्स पब्लिकेशन बंद हो जाती है, कभी किसी

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पार्ले पोप्पिंस – राम और श्याम एवं रुपहली धारियाँ

पार्ले पोप्पिंस कॉमिक स्ट्रिप विंटेज विज्ञापनों की श्रृंखला में आपका एक बार फिर स्वागत है. आज बात करेंगे एक और

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कॉमिक्स बाइट – कॉमिक्स पर ‘लेबल’ और क्या सिर्फ बच्चों के पढ़ने की चीज़ है कॉमिक्स?

कीनू रीव्स खुद मार्शल आर्ट्स में पारंगत है और 55 वर्ष की उम्र में भी बिलकुल फिट है. कॉमिक्स के

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आत्महत्या!

वर्ष 1996 राज कॉमिक्स द्वारा एक कॉमिक्स प्रकाशित हुई थी जिसका नाम था ‘आत्महत्या’. इसे ‘भोकाल’ सीरीज़ के अंतर्गत विज्ञापित

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मनोज कॉमिक्स: क्या रीप्रिंट होनी चाहिए?

भारत में कई कॉमिक्स पब्लिकेशन सक्रिय थी और इतने सारे पब्लिकेशन में से सबसे ज्यादा जो आज की मांग है

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कॉमिक्स बाइट: क्यूँ है कॉमिक्स पढ़ना अच्छा? (Comics Byte: Why You Should Read Comics)

कॉमिक्स बाइट ‘कॉमिक्स’ के प्रचार प्रसार के लिए बनी है, खासकर भारत के ‘कॉमिक्स जगत’ के लिए और ऐसे में

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कोरोना, कॉमिक बुक ऑक्शन और कॉमिक्स की दुकानें

दोस्तों हाल ही के दिनों में पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है, सरकारें एवं प्रसाशन अपनी ओर से

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राम और श्याम ने कराया – ‘शकुंतला का राजा से मिलन’

नमस्कार मित्रों, विंटेज विज्ञापनों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज पेश है पार्ले पोप्पिंस (Poppins) के किरदार ‘राम और

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Labour Day (श्रमिक दिवस)

आज अगर मैं आपसे पूछूँ की दुनिया कैसे चल रही है तो जाहिर है आप सरकारों, राजनीतिज्ञों, ब्यूरोक्रेट्स, बिज़नसमैन, रिटेलर्स,

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केस स्टडी: कॉमिक्स दीवानगी, नैतिक जिम्मेदारी और ‘कॉमिक्स अगेंस्ट कोरोना’ कैंपेन का उदय

जी हां, कॉमिक्स की दीवानगी की हद होती है, होनी भी चाहिए लेकिन कॉमिक्स या किताबें जीवन से बढ़ कर

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