ऑटोमैटिक: जब तकनीक बनी परमाणु की सबसे बड़ी दुश्मन – राज कॉमिक्स विशेषांक समीक्षा। (Automatic: When Parmanu Faced the Terror of Technology – Raj Comics Visheshank Review)
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नागराज एक्शन ईयर का धमाका – ऑटोमैटिक बनाम परमाणु! (A Nagraj Action Year blast – Automatic vs Parmanu!)
90 के दशक के आखिर में राज कॉमिक्स अपने सुनहरे दौर में थी। हर महीने पाठकों को कुछ नया देखने को मिल रहा था और 1999 को विशेष रूप से “नागराज एक्शन ईयर” घोषित किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य था पाठकों को बड़े स्तर की कहानियां, अधिक एक्शन और यादगार कॉमिक्स देना।
इसी दौरान प्रकाशित हुई राज कॉमिक्स विशेषांक – ऑटोमैटिक।

Artwork: Dheeraj Verma
यह सिर्फ परमाणु की एक और कॉमिक्स नहीं थी बल्कि तकनीक बनाम इंसान की लड़ाई पर आधारित एक हाई-एक्शन थ्रिलर थी। आज के AI और हैकिंग वाले दौर में इस कॉमिक का कॉन्सेप्ट और भी रोचक लगता है क्योंकि साल 1999 में ही ऐसी कहानी सोच लेना अपने आप में दिलचस्प बात थी।

कॉमिक्स का कवर महान कलाकार स्वर्गीय धीरज वर्मा जी द्वारा बनाया गया था जिसमें नागराज एक्शन ईयर का लोगो और फ्री पोस्टर/स्टिकर जैसी चीजें इसे और विशेष बनाती थीं।
कॉमिक्स डिटेल्स (Details)
- नाम: ऑटोमैटिक (Automatic)
- किरदार: परमाणु (इंस्पेक्टर विनय)
- प्रकाशक: राज कॉमिक्स
- संख्या: 133
- मूल्य (मूल प्रकाशन): 16/- (वर्तमान अनुमानित मूल्य: लगभग 160/- या अधिक)
- पृष्ठ संख्या: 64
- प्रकाशन वर्ष: 1999
विशेषता:
• आवरण पर नागराज एक्शन ईयर लोगो
• फ्री पोस्टर/स्टिकर
• एटम पोस्ट (फैन मेल)
• बोनस ग्रीन पेज
नागराज एक्शन ईयर 1999 में सिर्फ एक्शन नहीं था, बल्कि हर कॉमिक्स में रफ्तार, खतरा और बड़े स्तर की कहानियां देखने को मिल रही थीं। उन्हीं धमाकेदार विशेषांकों में से एक थी — ऑटोमैटिक।”
कहानी (Story)
कॉमिक्स शुरुआत से ही पाठकों को समय नहीं देती। तीसरे पेज से ही परमाणु एक्शन में दिखाई देता है। कहानी का मुख्य विलेन ऑटोमैटिक है, जिसके पास एक असाधारण क्षमता है, वह सेकंडों में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक या इलेक्ट्रिक उपकरण को नियंत्रित कर सकता है। उसका उद्देश्य है सुपर पावर बैटरियों से जुड़ा एक गुप्त कोड प्राप्त करना, जिसकी जानकारी छिपी हुई है श्रीहरिकोटा में।

ऑटोमैटिक प्रोफेसर चावला को निशाना बनाता है और यहां से कहानी तेजी से आगे बढ़ती है। सबसे रोमांचक दृश्य तब आता है जब ऑटोमैटिक SLV 2000 सैटेलाइट को नियंत्रित कर दिल्ली की ओर मोड़ देता है। शहर के ऊपर मंडराता खतरा और उसके सामने खड़ा अकेला परमाणु कहानी में रोमांच बढ़ा देता है।
लेकिन मामला यहीं नहीं रुकता। प्रोफेसर चावला को डिफेंस बेस में छिपाया जाता है, लेकिन ऑटोमैटिक वहां तक पहुंच जाता है। इसके बाद कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ आता है और ऑटोमैटिक परमाणु की बेल्ट को ही नियंत्रित कर लेता है और उसके स्पेस कोऑर्डिनेट्स बदल देता है, जिससे परमाणु लगभग अंतरिक्ष में पहुंच जाता है।
अब सवाल यह है की:
- क्या ऑटोमैटिक अपना मिशन पूरा करेगा?
- क्या परमाणु वापस लौट पाएगा?
- और क्या तकनीक की इस लड़ाई में इंसानी दिमाग जीत पाएगा?

Artwork: Suresh Digwal
आर्टवर्क और प्रस्तुति (Team & Artwork )
सुरेश डिगवाल जी ने शानदार काम किया है। कॉमिक्स के पैनल्स में लगातार मूवमेंट महसूस होती है और एक्शन सीक्वेंस बहुत ऊर्जा से भरे हुए लगते हैं, इंकिंग टीम भी किसी सुपरस्टार लाइनअप से कम नहीं थी। मनु और दिलीप चौबे जैसे कलाकारों का प्रभाव कई पेजों पर साफ महसूस होता है। कुछ पैनलों में परमाणु का चेहरा और भाव-भंगिमाएं मनु जी की शैली की याद दिलाते हैं।
- लेखक: हनीफ आज़हर
- सहयोग: विवेक मोहन
- चित्रांकन: सुरेश डिगवाल
- इंकिंग: मनु, विट्ठल कांबले, दिलीप चौबे
- सुलेख एवं रंग: सुनील पांडे
- संपादक: मनीष गुप्ता
- प्रस्तुति: संजय गुप्ता

निष्कर्ष (Conclusion)
ऑटोमैटिक उन कॉमिक्स में से है जो ज्यादा सोचने का समय नहीं देती। यह विलेन की उत्पत्ति पर समय नहीं लगाती, न ही लंबी बैकस्टोरी देती है। सीधे एक्शन, खतरा और तेज रफ्तार कहानी और शायद यही नागराज एक्शन ईयर की पहचान भी थी।

अगर आप पुराने राज कॉमिक्स प्रशंसक हैं या तेज गति वाली एक्शन कहानियां पसंद करते हैं, तो ऑटोमैटिक एक अच्छा अनुभव साबित हो सकती है। इसमें मौजूद “एटम पोस्ट” उस दौर का फैन इंटरैक्शन सेक्शन था और कॉमिक्स में आगे आने वाली “विनाशक” और “डोमा” के विज्ञापन भी थे। आज AI और साइबर हैकिंग के दौर में यह कहानी अपने समय से आगे की सोच जैसी लगती है। आभार – काॅमिक्स बाइट!!




