जम्बू और ऑक्टोप्सी रिव्यू: जम्बू की एलियन से खौफनाक टक्कर। (Jambu and Octopussy Review: When Jambu Faced an Alien Nightmare)
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जम्बू बनाम ऑक्टोप्सी – साइंस फिक्शन और रोमांच का दमदार संगम! (Jambu vs Octopsy – a thrilling blend of science fiction and action!)
कुछ कॉमिक्स ऐसी होती हैं जो सिर्फ एक कहानी नहीं रहतीं, बल्कि यादों का हिस्सा बन जाती हैं। “जम्बू और ऑक्टोप्सी” मेरे लिए ऐसी ही एक कॉमिक्स है जिसे कुछ वर्ष पहले इसे काॅमिक्स इंडिया ने पुन: प्रकाशित किया और इसने तुरंत मेरा ध्यान खींच लिया। वैसे मेरे पास तुलसी कॉमिक्स की बहुत कम कॉमिक्सें थीं, लेकिन 90s में जब मैं अपनी “सुमन लाइब्रेरी” चलाता था, तब जम्बू और ऑक्टोप्सी उन चुनिंदा कॉमिक्सों में थी जिसे लोग बार-बार पढ़ना पसंद करते थे।

Cover Artwork – Pratap Mullick
जम्बू उस समय मुझे बड़ा शानदार किरदार लगा था। एक मशीनी मानव, लेकिन केवल मशीन नहीं। उस दौर में शायद मैंने इंस्पेक्टर स्टील की बहुत कॉमिक्स पढ़ी थीं या पढ़ी ही नहीं थी। स्टार टीवी पर ‘रोबोकॉप’ का कार्टून जरूर देखा था, लेकिन तब इतनी तुलना करने का दौर नहीं था। हम बस पढ़ते थे, आनंद लेते थे और कहानी और आर्टवर्क के साथ खो जाते थे।
इस कॉमिक्स का कवर दिवंगत प्रताप मुलिक जी ने बनाया था और कहना पड़ेगा कि आवरण बेहद आकर्षक बना है। सामने जम्बू और बंटी दिखाई देते हैं, जबकि ऑक्टोप्सी अपने भयावह रूप में जम्बू पर हमला करती दिखती है। उसके ऑक्टोपस जैसे टेंटिकल्स बाहर निकले हुए हैं और कॉमिक्स का शीर्षक भी घुमावदार स्टाइलिश फॉन्ट में लिखा गया है, जो इसे और भी अलग पहचान देता है।
विवरण (Details)
कॉमिक्स: जम्बू और ऑक्टोपसी
प्रकाशक: तुलसी कॉमिक्स और काॅमिक्स इंडिया
लेखक: वेद प्रकाश शर्मा
चित्रांकन: भारत मकवाना
संपादक: प्रमिला जैन
मूल्य (उस दौर में): 6/- रूपये
संख्या: 130
कहानी (Story)
कहानी की शुरुआत कॉलेज की छुट्टियों पर निकले विद्यार्थियों के एक दल से होती है। उनकी बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और बाहर आने पर उन्हें एक रहस्यमयी महिला दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही वे उसे पलटते हैं, मामला डरावना मोड़ ले लेता है। उसकी आंखों में पुतलियां नहीं होतीं, चेहरा भयावह होता है और देखते ही देखते वह ऑक्टोप्सी के रूप में सामने आ जाती है।

इसके बाद जो होता है, वह कहानी को अचानक हॉरर और साइंस-फिक्शन के मिश्रण में बदल देता है। ऑक्टोपसी बेहद शक्तिशाली है और सभी बच्चों को समाप्त कर देती है। आगे एक पुल टूटता है, शहर में दहशत फैलती है और खबरें आने लगती हैं कि तीन दिन के भीतर पृथ्वी का तापमान इतना बढ़ जाएगा कि मानव जीवन समाप्त हो जाएगा।
इधर बंटी, जम्बू के पास पहुंचता है। जम्बू कोई साधारण सुपरहीरो नहीं है। वह डॉक्टर भावा का आविष्कार है, एक लोहे की मशीन जिसके भीतर डॉक्टर भावा का मस्तिष्क प्रत्यारोपित है। उसका सहायक है डाॅ भावा का बेटा – बंटी, जो देशभक्त और जिंदादिल बच्चा है।

जम्बू पृथ्वी की कक्षा में दिखाई देने वाले एक रहस्यमयी यान का पीछा कर रहा होता है। धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि यह पूरा मामला पृथ्वी से बाहर का है। एक एलियन आक्रमण। उसके बाद ऑक्टोप्सी के सहयोगी टांगचक्र का प्रवेश होता है और फिर शुरू होता है एक्शन।
जम्बू और ऑक्टोप्सी की भिड़ंत इस कॉमिक्स की जान है। जम्बू अपने हथियारों से उसके टेंटिकल्स काट देता है, लेकिन ऑक्टोप्सी इतनी आसानी से हार मानने वालों में नहीं है। आगे यान, विस्फोट, बचाव और पृथ्वी को बचाने की दौड़ कहानी को लगातार तेज गति देती रहती है जो अप्रत्याशित तो नहीं हैं पर उस दौर में काफी पसंद की गई थी।

निष्कर्ष (Conclusion)
अगर आज के नजरिए से देखें तो कहानी में एलियन इन्वेजन, साइंस फिक्शन और रोबोटिक सुपरहीरो का मिश्रण दिखाई देता है। लेकिन उस दौर में ये चीजें बच्चों के लिए नई और रोमांचक थीं। हम लॉजिक ढूंढने नहीं बैठते थे; हम बस कहानी का मजा लेते थे।

जम्बू और ऑक्टोप्सी सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं, बल्कि 90s के पाठकों के लिए एक अनुभव थी। अगर आप तुलसी कॉमिक्स के पाठक रहे हैं, तो यह उन कहानियों में से है जिसे दोबारा पढ़ने का मन जरूर करेगा। आभार – काॅमिक्स बाइट!!




