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धुरंधर 2 रिव्यू – चार घंटे का सिनेमाई महायुद्ध जिसने बॉक्स ऑफिस में भूचाल ला दिया। (Dhurandhar 2 Review – A 4-Hour Cinematic War That’s Shaking the Box Office.)

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धुरंधर 2: आदित्य धर की यह भव्य सिनेमाई प्रस्तुति फिक्शन और वास्तविक घटनाओं की झलक को मिलाकर एक यादगार थिएटर अनुभव देती है। (Dhurandhar 2: A massive cinematic spectacle by Aditya Dhar that blends fiction with echoes of real events, delivering an unforgettable theatrical experience.)

Dhurandhar 2 - Movie Review - Comics Byte
Dhurandhar 2 – Movie Review – Comics Byte

कुछ फिल्में आती हैं और चली जाती हैं।
कुछ फिल्में थोड़ी देर तक चर्चा में रहती हैं।

और फिर कभी-कभी कोई फिल्म ऐसी भी आती है जो सिर्फ एक मनोरंजन नहीं रहती, बल्कि एक अनुभव बन जाती है।

धुरंधर 2 उसी श्रेणी की फिल्म है।

पहले भाग की सफलता के बाद निर्देशक ने इस कहानी को जिस पैमाने पर आगे बढ़ाया है, वह सिर्फ एक सीक्वल नहीं बल्कि एक विस्तृत सिनेमाई विस्तार लगता है। इस लेख के लिखे जाने तक फिल्म 1000 करोड़ रुपये से अधिक का वर्ल्डवाइड कारोबार कर चुकी है और बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। लेकिन सिर्फ कमाई ही इसकी चर्चा का कारण नहीं है।

असल वजह यह है कि दर्शक चार घंटे लंबी फिल्म को भी पूरी तन्मयता के साथ देखते हैं। जिसके पीछे एक वृहद टीम और उसका विजन साकार किया गया है, जो दर्शकों को भी कहानी के साथ घटित होती घटनाओं से जोड़ता है।

थिएटर में देखा गया एक दुर्लभ दृश्य

आज के दौर में जब कई फिल्में सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहुँच जाती हैं, धुरंधर 2 ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि बड़े पर्दे का अनुभव क्यों अलग होता है।

Dhurandhar 2 - Movie Review - Comics Byte
Dhurandhar 2 – Movie Review – Comics Byte

पीवीर हिंजवाडी के एक मल्टीप्लेक्स में जो दृश्य देखने को मिला, वह अपने आप में दिलचस्प था। रात 10:30 बजे, फिर सुबह 3:30 बजे और उसके 6 बजे का शो, और उसके बाद दोपहर और शाम तक। हर ऑडिटोरियम में एक ही फिल्म – धुरंधर 2। शायद यह पहली फिल्म है जो 24 घंटे चल रही है।

फिल्म का रनटाइम करीब चार घंटे है और इंटरवल व विज्ञापनों के साथ शो लगभग साढ़े चार घंटे तक खिंच जाता है। इसके बावजूद दर्शकों का उत्साह कम नहीं होता।

डाॅल्बी साउंड सिस्टम में जब फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर गूंजता है तो अनुभव और भी प्रभावशाली हो जाता है। कई दर्शकों के लिए यह सिर्फ फिल्म देखना नहीं बल्कि एक सिनेमाई इवेंट बन जाता है। म्यूजिक कंपोजर इस कार्य के लिए बधाई के पात्र है।

कहानी की परतें

तकनीकी रूप से यह एक फिक्शनल कहानी है, लेकिन निर्देशक ने इसमें कई ऐसे संकेत और संदर्भ शामिल किए हैं जो वास्तविक घटनाओं की याद दिलाते हैं।

Dhurandhar 2 - Movie Review - Comics Byte
Dhurandhar 2 – Movie Review – Comics Byte

फिल्म को अलग-अलग चैप्टर्स में आगे बढ़ाया गया है। शुरुआत जसकिरत सिंह रंगी के अतीत से होती है, जहाँ दर्शक धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व और संघर्ष को समझते हैं। इसके बाद कहानी वर्तमान में प्रवेश करती है और दिखाती है कि कैसे उसके निर्णय कई लोगों की जिंदगी को प्रभावित करते हैं।

कहानी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म दर्शकों को हर उत्तर सीधे नहीं देती। कई जगह सिर्फ संकेत मिलते हैं, और दर्शक खुद डॉट्स जोड़ने लगता है। यही वजह है कि लंबा रनटाइम भी कहानी को बोझिल नहीं बनाता।

अभिनय जो कहानी को जीवित कर देता है

फिल्म में कलाकारों की एक लंबी सूची है, लेकिन अच्छी बात यह है कि लगभग हर किरदार कहानी का हिस्सा महसूस होता है। रणवीर सिंह हमज़ा अली माज़री के किरदार में पूरी तरह डूबे हुए नजर आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि “हमज़ा” शब्द का अर्थ ही होता है ‘शेर’। और रणवीर सिंह पूरे फिल्म में इस अर्थ को सचमुच चरितार्थ करते दिखाई देते हैं।

उनकी बॉडी लैंग्वेज, संवाद बोलने का अंदाज़ और कई तीव्र दृश्यों में उनका भावनात्मक नियंत्रण किरदार को सिर्फ एक नायक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक उपस्थिति बना देता है।

Dhurandhar 2 - Movie Review - Comics Byte
Dhurandhar 2 – Movie Review – Comics Byte

साथ ही अर्जुन रामपाल, आर माधवन, संजय दत्त, गौरव गेरा और सारा अर्जुन जैसे कलाकार अपने-अपने हिस्सों में कहानी को मजबूती देते हैं। लेकिन इस पूरी कास्ट में एक नाम ऐसा भी है जो कई दर्शकों को चौंका देता है और वो है राकेश बेदी। जिन्हें अक्सर हल्के-फुल्के या हास्यपूर्ण किरदारों में देखा गया है, वे यहाँ एक अलग ही रूप में दिखाई देते हैं। उनका प्रदर्शन यह याद दिलाता है कि अनुभवी कलाकार जब सही भूमिका में आते हैं तो वे कहानी को अप्रत्याशित गहराई दे सकते हैं।

दृश्य भाषा और सिनेमैटिक स्टाइल

अगर आप कॉमिक्स पढ़ने के शौकीन हैं तो फिल्म के कई दृश्य आपको परिचित से लग सकते हैं। कुछ फ्रेम ऐसे हैं जो सचमुच ग्राफिक नॉवेल के पैनल जैसे लगते हैं। कई एक्शन सीक्वेंस ऐसे हैं जिन्हें देखते समय ऐसा महसूस होता है मानो कोई बड़ा स्प्लैश पेज सामने खुल गया हो।

Dhurandhar 2 - Movie Review - Comics Byte

यही वजह है कि कई दर्शकों के मन में यह विचार आता है कि अगर कभी इस फिल्म का ग्राफिक नॉवेल रूपांतरण किया जाए तो वह भारतीय कॉमिक्स जगत के लिए एक बेहद रोचक प्रयोग हो सकता है। कृपया निर्देशक अदित्य धर इस विषय में संज्ञान जरूर लें।

फिल्म का भाव

धुरंधर 2 सिर्फ एक्शन और स्पेक्टेकल तक सीमित नहीं है। इसके भीतर एक भाव भी है। यह उन लोगों को याद करती है जो अक्सर इतिहास के पन्नों में नहीं दिखाई देते, वे सैनिक, वे एजेंट, वे लोग जिनका काम पर्दे के पीछे होता है।

हिंदी में ऐसे लोगों के लिए एक शब्द है – “अज्ञात”।

फिल्म उन्हीं अज्ञात योद्धाओं को एक तरह से सम्मान देती है।

अंतिम विचार

सिनेमा के विशाल परिदृश्य में फिल्में हर साल बनती हैं, और उनमें से कुछ ऐसी होती हैं जो कभी-कभी ही बन पाती हैं।

Dhurandhar 2 - Movie Review - Comics Byte
Dhurandhar 2 – Movie Review – Comics Byte

धुरंधर 2 उन्हीं दुर्लभ फिल्मों में से एक है। पैमाना बड़ा है, कथा महत्वाकांक्षी है और प्रस्तुति में एक सिनेमाई साहस दिखाई देता है। निर्देशक ने एक ऐसा सिनेमाई अनुभव रचने की कोशिश की है जो अपने आकार और महत्वाकांक्षा दोनों में बड़ा है, और इस फिल्म ने अपने प्रदर्शन से इस अनुभव को और भी प्रभावशाली बना दिया है। यही वजह है कि यह कहना गलत नहीं होगा, दर्शकों को इस फिल्म को बिलकुल भी मिस नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसी फिल्में हर साल नहीं बनतीं या शायद आज तक बनी ही नहीं, पर अब आपके समक्ष हैं। आभार – काॅमिक्स बाइट!!

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4 thoughts on “धुरंधर 2 रिव्यू – चार घंटे का सिनेमाई महायुद्ध जिसने बॉक्स ऑफिस में भूचाल ला दिया। (Dhurandhar 2 Review – A 4-Hour Cinematic War That’s Shaking the Box Office.)

  • बहुत ही जबरदस्त और बेमिसाल ! बहुत एन्जॉयबल ! ऐसी फिल्में यदा-कदा ही बनती है जब सबका मूड बनता है !
    और सही बात है यह हमें भी अपने फील्ड पर कुछ कर दिखाने के लिए इंस्पायर भी करती हैं !

    • जी बिलकुल सही कहा आपने।

  • साथ ही आपके ब्लॉग पर लम्बे समय बाद आ रहा हूं, ये खुद मेरे लिए भी बहुत सुखद अनुभव है ! अब आपके बाकी ब्लॉग पोस्ट पढ़ने की भी उत्सुकता है !

    • आभार रवि जी।

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