क्रॉसवर्ड औंध – कभी पुणे की शान, अब बस एक याद (Crossword Aundh – Once the pride of Pune, now just a memory)
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औंध का क्रॉसवर्ड अब इतिहास बन चुका है, लेकिन उसकी यादें बनी रहेंगी। (Aundh’s crossword is now history, but the memories will remain.)
पुणे के औंध क्षेत्र, आई.टी.आई रोड में स्थित भारत का सबसे बड़ा क्रॉसवर्ड (Crossword) बुकस्टोर अब हमेशा के लिए बंद हो गया है। यह खबर हर उस व्यक्ति के लिए एक गहरी चुभन लेकर आई है, जो कभी इस पुस्तकालयनुमा स्थान पर घंटों बिता देता था। पुस्तक प्रेमियों के लिए यह स्थान एक शरणस्थली जैसा था – एक ऐसी जगह जहां किताबें बोलती थीं और विचार बहते थे।

क्रॉसवर्ड औंध को कभी पुणे की शान कहा जाता था। तीन मंज़िलों में फैला यह विशाल बुकस्टोर केवल एक दुकान नहीं था, बल्कि एक बुक हेवन था — जहाँ किताबें थीं, स्टेशनरी थी, खिलौने थे, ग्राफिक नॉवेल्स और कॉमिक्स का शानदार संग्रह था। हर उम्र का पाठक यहाँ खुद को जोड़ पाता था।
आज जब उसी जगह क्रॉसवर्ड की जगह कोई और ब्रांड या दुकान देखती है नज़र, तो दिल में एक ‘कल्चरल शॉक’ जैसा महसूस होता है। ऐसा लगता है जैसे हमारी सांस्कृतिक पहचान से कुछ छिन गया हो। जो लोग यहाँ वीकेंड बिताते थे, जो किताबों के बीच शांति ढूँढते थे, उनके लिए यह सिर्फ दुकान नहीं थी, यह उनकी दुनिया थी।
📉 क्यों बंद हुआ क्रॉसवर्ड औंध?
इस बदलाव के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता प्रभाव –
अब पाठक Amazon और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से किताबें खरीदना पसंद करते हैं, जहाँ उन्हें MRP पर भारी छूट मिलती है। इससे स्टोर में आने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई। - बढ़ता किराया –
जिस बिल्डिंग में यह स्टोर था, उसके मालिक ने नए किराए की मांग की, जो क्रॉसवर्ड के लिए वहन करना संभव नहीं था। बताया जा रहा है कि कुछ संभावित किरायेदार अधिक रकम देने को तैयार थे, इसलिए क्रॉसवर्ड को अपना स्थान खाली करना पड़ा।

🏬 अब कहाँ हैं क्रॉसवर्ड के स्टोर?
क्रॉसवर्ड अब छोटे आउटलेट्स के रूप में मॉल्स में अपनी जगह बना रहा है:
- Westend Mall, Aundh (आई.टी.आई रोड वाली बहुमंजिला ईमारत वाली स्टोर अब वेस्टएंड मॉल में शिफ्ट हो चुकी है)
- Phoenix Mall of the Millennium, Wakad
- Pavilion Mall, SB Road
यहां उन्हें कुछ हद तक फुटफॉल जरूर मिलता है, लेकिन औंध जैसा अनुभव वहां नहीं है।

💔 एक सांस्कृतिक झटका
आज का समय किताबों और साहित्य के लिए अलार्म बजा रहा है। बड़े-बड़े बुकस्टोर जैसे क्रॉसवर्ड, हॉलमार्क और व्हीलर्स या तो बंद हो गए हैं या रेस्टोरेंट/फ़ूड जॉइंट्स में बदल गए हैं। पुराने ज़माने के सेकंड-हैंड बुक सेलर्स भी धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं क्योंकि नई किताबें इतनी बिक ही नहीं रही कि कोई उन्हें फिर से बेच सके। बुकस्टोर्स निकट भविष्य में कहीं किताबी बात ही ना बनकर रह जाए! इसके उपाय तो पाठकों को ही करने होंगे। कुछ मुख्य कारण:
📱 टेक्नोलॉजी और गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता ने पुस्तक संस्कृति को हाशिए पर धकेल दिया है। अब बच्चों से लेकर बड़ों तक की दुनिया मोबाइल और टैब में सिमट गई है।
कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवेल्स का क्या होगा? एक ज़माना था जब राज कॉमिक्स, अमर चित्र कथा, चाचा चौधरी, सुपर कमांडो ध्रुव, नागराज जैसी किताबें हर घर में मिलती थीं। लेकिन आज कुछ हजार कॉपी बेचना भी एक बड़ा टारगेट बन गया है।”

📣 यह सिर्फ दुकान का बंद होना नहीं, चेतावनी है!
क्रॉसवर्ड औंध का बंद होना एक संकेत है – यदि हम अपनी पुस्तक संस्कृति को नहीं बचा पाए, तो अगली पीढ़ी को केवल डिजिटल दुनिया ही मिलेगी।
📢 पाठकों से भावुक अपील
पुस्तकें सिर्फ ज्ञान का माध्यम नहीं हैं, वे हमारी सोच, भावनाओं और संस्कृति का प्रतीक हैं। आइए हम फिर से किताबों की ओर लौटें – छोटे स्टोरों को सपोर्ट करें, बच्चों को लाइब्रेरी ले जाएं और अपने आस-पास किताबों की दुनिया को बचाएं। आभार – कॉमिक्स बाइट!!
पढ़े: कॉमिक्स बाइट: क्यूँ है कॉमिक्स पढ़ना अच्छा? (Comics Byte: Why You Should Read Comics)
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