90’s का स्वर्णिम दौर: सुपर कमांडो ध्रुव के डबल स्प्रेड विज्ञापनों की जादुई दुनिया (The Golden Era of the 90s: The Magic of Super Commando Dhruv’s Double-Spread Comics Advertisements)
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राज काॅमिक्स के डबल स्प्रेड विज्ञापन, कला और एक्शन का संगम। (Raj Comics Double-Spread Ads, Where Promotion Met Pure Art.)
90 के दशक में भारतीय कॉमिक्स का जो स्वर्णिम काल था, उसे केवल कहानियों ने ही नहीं, बल्कि उनके प्रस्तुतिकरण ने भी अमर बनाया। 32 पृष्ठों की पेपरबैक कॉमिक्स के अंत में जब कहानी समाप्त होती थी, तब अक्सर एक पेज का फुल ब्लो-अप विज्ञापन या कभी-कभी दो-तीन आगामी अंकों के विज्ञापन देखने को मिलते थे। बैक कवर पर उसी श्रृंखला की अगली कॉमिक का प्रमोशनल आर्ट छपा होता था।

Art By Anupam Sinha
लेकिन जो अलग ही स्तर का अनुभव देता था, वह था डबल स्प्रेड विज्ञापन, दो पूरे पन्नों पर फैला हुआ एक्शन, ऊर्जा और रोमांच से भरपूर दृश्य। ऐसा ही एक शानदार उदाहरण है ‘सुपर कंमाडो ध्रुव’ का यह विज्ञापन, जो अपने आप में 90’s के कॉमिक्स इतिहास की कला-परंपरा का प्रतीक है।
डबल स्प्रेड विज्ञापन का अलग ही स्वाद
सामान्य विज्ञापनों में केवल कवर आर्ट या सीमित दृश्य दिखते थे, लेकिन डबल स्प्रेड में कलाकार को पूरी स्वतंत्रता मिलती थी। यहाँ पात्र केवल खड़े नहीं रहते बल्कि वो जीवंत लगते थे, जैसे इस विज्ञापन में दौड़ते, कूदते, लड़ते और विस्फोटों के बीच संघर्ष करते यह सभी पात्र। इस विज्ञापन में ध्रुव के साथ उनकी पूरी कमांडो फोर्स एक्शन में नजर आती है। खास बात यह है कि यहाँ केवल नायक ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी पात्र भी प्रमुखता से दिखाए गए हैं जैसे “नताशा और चंडिका”।
यह विज्ञापन “कैप्टन ध्रुव” के सभी सहयोगियों को एक फ्रेम में प्रस्तुत करता है, जो उस दौर के पाठकों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। ‘खूनी खिलौने’ राज कॉमिक्स के इतिहास में एक कल्ट कॉमिक्स मानी जाती है। इसी में पहली बार रहस्यमयी और खतरनाक खलनायक ‘बौना वामन’ दिखाई दिया था। इस डबल स्प्रेड विज्ञापन में भी बौना वामन अपने घातक खिलौनों के साथ नजर आता है। “टॉयज़ इन एक्शन” की अवधारणा उस समय बेहद अनोखी थी और खिलौने जो मासूमियत का प्रतीक होते हैं, यहाँ विनाश के हथियार बने हुए हैं। विशालकाय रोबोट, किंग साइज गोरिल्ला और बौना वामन का संयोजन दृश्य को और भी रोचक बना देता है। ध्रुव और कमांडो फोर्स इन सबके बीच जूझते हुए दिखते हैं, मानो पूरा राजनगर दांव पर लगा हो।

अनुपम सिन्हा की मास्टर क्लास
इस अद्भुत कला के पीछे है महान कलाकार अनुपम सिन्हा जी। उनकी रेखाओं में गति है, संरचना में संतुलन है और हर पात्र की बॉडी लैंग्वेज अलग पहचान रखती है। जैसे विज्ञापन में गोरिल्ला के चेहरे पर उभरती उग्रता, उस दौर में रोबोटिक दैत्य की यांत्रिक शक्ति, बौना वामन की चालाकी एवं कुटीलता एवं साथ ही सुपर कमांडो ध्रुव की फुर्ती और आत्मविश्वास जो उन्हें टक्कर दे रही है।
डबल स्प्रेड होने के कारण कलाकार को परिप्रेक्ष्य और स्केल के साथ खेलने का अवसर मिला। यही कारण है कि दृश्य केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र पोस्टर जैसा प्रभाव छोड़ता है।
क्यों था यह स्वर्णिम युग?
90’s का दौर इसलिए खास था क्योंकि – कहानियाँ मजबूत थीं, किरदार गहराई लिए हुए थे और प्रस्तुति में जुनून था। डबल स्प्रेड विज्ञापन केवल प्रमोशन नहीं थे, वे पाठकों की कल्पना में उत्सुकता जगाने वाले टीज़र थे। कहानी खत्म होते ही जब ऐसा धमाकेदार दृश्य सामने आता था, तो अगली कॉमिक्स खरीदने की उत्सुकता कई गुना बढ़ जाती थी। आज डिजिटल युग में प्रमोशन के अनगिनत माध्यम हैं, लेकिन उस समय दो पन्नों में फैली ऐसी कला ही सबसे बड़ा आकर्षण थी।

यह डबल स्प्रेड विज्ञापन केवल एक प्रमोशनल पेज नहीं, बल्कि 90’s के भारतीय कॉमिक्स उद्योग की रचनात्मकता का प्रतीक है। सुपर कमांडो ध्रुव, बौना वामन, खूनी खिलौने, विशाल रोबोट और कमांडो फोर्स, ये सभी एक ही फ्रेम में। यह केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि उस दौर की यादों का जीवंत दस्तावेज है। सचमुच, वह एक “गोल्डन एरा” था और इसके पीछे ठोस कारण थे। इतनी बारीकी, इतनी ऊर्जा और इतनी सुंदरता… यह वास्तव में एक मास्टर क्लास थी। राज कॉमिक्स और अनुपम जी ने वाकई में उस दौर को यादगार बना दिया था। आभार – काॅमिक्स बाइट!!
पढें: संस्मरण: खूनी खिलौने – सुपर कमांडो धुव (Memoir: Khooni Khilaune – Super Commando Dhruva)




